समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष रामधारी यादव तीन बार जिला अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं। इनकी उम्र करीब 65 वर्ष है। रामधारी यादव जब पहली बार जिला अध्यक्ष बने तब गाजीपुर में समाजवादी पार्टी की ज्यादातर सीटें जीत ली गई थी सुबह में भी सपा की सरकार आई और मुख्यमंत्री बने अखिलेश यादव। रामधारी जब दूसरी बार सपा के जिला अध्यक्ष बने तो यह कार्यकाल उनके लिए कुछ ज्यादा अच्छा नहीं रहा। रामधारी यादव के तीसरे कार्यकाल में भले ही विधानसभा की सातों सीटें समाजवादी पार्टी के खाते में गई हूं लेकिन जिला पंचायत के चुनाव में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं कहा जा सकता। के ऊपर फाटक कहां है कहा जाता है कि रामधारी यादव हर मुद्दों को लेकर हमेशा तत्पर रहते हैं।

वही बात यदि नन्हकू यादव की करें तो इनकी उम्र करीब 65 वर्ष है। वह 2017 से 2020 तक लगातार 2 बार गाजीपुर के जिला अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बसपा के गठबंधन में सीट गठबंधन के खाते में आई थी। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में जंगीपुर और सैदपुर के रूप में महज दो सीटें सपा के खाते में आई। वहीं सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि ननकू यादव मृदुभाषी और शांत स्वभाव के व्यक्ति हैं। नन्हकू यादव 2 बार एमएलसी चुनाव में भी किस्मत आजमा चुके हैं। पहली बार

वहीं बात गोपाल यादव की करें तो, इनकी उम्र करीब 53 वर्ष है। वह सपा के प्रदेश कार्यकारिणी में रह चुके हैं, साथ ही सपा के स्थापना के समय छात्र सभा के प्रदेश महासचिव रह चुके हैं। इन्होंने 2000 में ब्लॉक प्रमुख के लिए भी किस्मत आजमा चुके हैं। ये 2012 में राज्य कमेटी में सदस्य भी रह चुके हैं। गोपाल यादव के अंदर छात्र राजनीति से लेकर प्रदेश कार्यकारिणी तक का लंबा अनुभव रह चुका है।

वही राजेश कुशवाहा 2017 में समाजवादी पार्टी के टिकट से सदर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी थे इसके पहले वह समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इनकी उम्र करीब 45 वर्ष होगी। इनको कुशवाहा समाज के बड़े चेहरे के रूप में देखा जाता है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि समाजवादी पार्टी यदि यादव समाज के अतिरिक्त कोई चेहरा जिला अध्यक्ष के रूप में देना चाहती है तो राजेश कुशवाहा एक अच्छा विकल्प होंगें।

वही चंद्रिका यादव और सदानंद यादव भी अध्यक्ष की दौड़ में शामिल हैं। ये पार्टी के सक्रिय नेताओं में से और युवा हैं। जन सरोकार के मुद्दों में ये हमेशा आगे नजर आते हैं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश अध्यक्ष को छोड़कर सभी कार्यकारिणी को भंग कर दिया था। संभावनाएं जताई जा रही है कि अखिलेश कुछ नया प्रयोग करना चाहते हैं। यदि यह संभावनाएं सही है तो यह भी मुमकिन है कि अखिलेश यादव चाहेंगे की जिला कार्यकारिणी में मुस्लिम चेहरों को भी जगह दिया जाए। गाजीपुर में जिला अध्यक्ष पद की रेस में वैसे तो कई नाम है जिसमें से ज्यादातर यादव समाज से आते हैं। वही बात यदि मुस्लिम समाज की करें तो गाजीपुर के जिला उपाध्यक्ष अहमर जमाल एक प्रमुख चेहरा है। ये युवा हैं, प्रखर वक्ता हैं साथी समाजसेवी भी हैं। गाजीपुर में युवाओं के अंदर इनकी अच्छी पकड़ है वहीं सपा के कार्यकर्ता भी इनको ज्यादा पसंद करते हैं। जन सरोकार के मुद्दों पर यह हमेशा ही प्रमुखता से अपनी बात रखते आए हैं। जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं के बट जाने की वजह से समाजवादी पार्टी को नुकसान सहना पड़ा था संभावनाएं हैं कि अखिलेश यादव जिला कार्यकारिणी में मुस्लिम चेहरों को जगह दे सकते हैं।

समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनाव से पहले गाजीपुर में अहमद जमाल के रूप में एक मुस्लिम चेहरे को जिला उपाध्यक्ष बनाकर भेजा था गाजीपुर के मुस्लिम समाज के बीच अहमर जमाल की अच्छी पकड़ है। ये गाजीपुर सदर सीट के प्रबल दावेदार भी थे लेकिन विधानसभा चुनाव के ठीक पहले अंसारी परिवार के सपा में आ जाने की वजह से सपा के पास दावेदार हो गए, इसलिए सपा से इनका टिकट काट गया। लेकिन सपा का मूल क़ाडर होना यानी शुरू से ही समाजवादी पार्टी में बने रहना इनकी एक ताकत है।

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