यूपी विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Elections 2022) में जीत के लगभग 4 महीने बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का आगमन अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी (Varanasi News) में हुआ. गुरुवार को प्रधानमंत्री ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में लगभग 4 से 5 घंटे का वक्त बिताया और तीन अलग-अलग कार्यक्रमों में शरीक हुए, साथ ही एक जनसभा को भी संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने करीब 1800 करोड़ की 43 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास भी किया. जिसमे रिंग रोड, पर्यटन विकास, स्टेडियम इत्यादि शामिल है. इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान भी मौजूद रहे.

शानदार विकास कार्य का शानदार कवरेज. हो भी चाहिए. आखिर ये सब देश हित ही तो है. इक तरफ जहाँ प्रधानमंत्री वाराणसी को भरपूर प्यार दे रहे हैं तो वहीँ दूसरी तरफ अग्निपथ योजना को लेकर हुए बवाल के मास्टरमाइंड गिरफ्तार हो रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गुरुवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन पर वाराणसी में आयोजित अखिल भारतीय शिक्षा समागम (Akhil Bhartiya Shiksha Samagam) का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि ये “समागम आज ऐसे समय हो रहा है, जब देश अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है. अमृत काल में देश के अमृत संकल्पों को पूरा करने की बड़ी जिम्मेदारी हमारी शिक्षा व्यवस्था और युवा पीढ़ी पर है.” ये तो प्रधानमंत्री ने कहा, लेकिन हमने ये भी देखा कि इसी अमृत काल में कई सारे युवाओं ने अग्निपथ जैसी योजना का विरोध किया, बवाल किया. चर्चा तो इस पार भी होनी चाहिए की आखिर क्यों किया? सिक्के के तो दोनों पहलु होते हैं. लेकिन हमें जो पसंद है हम आँखों पर चश्मा लगाये उसी पर चर्चा करते हैं और उसी पर विश्वास.

बहरहाल पीएम मोदी ने कहा कि, “नई नीति में पूरा फोकस बच्चों की प्रतिभा और चॉइस के हिसाब से उन्हें skilled बनाने पर है. हमारे युवा skilled हों, confident हों, practical और calculative हो, शिक्षा नीति इसके लिए जमीन तैयार कर रही है.” प्रधानमंत्री के इस बात का समर्थन होना चाहिए, जिस बच्चे के अन्दर जो हुनर हो उसे निखारने की जरुरत है, ज्यादातार अभिभावक अपने बच्चों पर जबरदस्ती डॉक्टर बनने का दबाव डालते हैं जबकि उसे आईएएस बनना होता है, वैसे किसी के ऊपर IAS बनने का दबाव है तो उसे एप डेवलपर बनना है. दबाव नहीं होना चाहिए. तो फिर जिस लड़के ने सिलेक्शन प्रोसेस के सारे स्टेज को पास कर लिया और जोइनिंग लेटर के इन्तेजार में हो तो उसपर दुबारा फॉर्म भरने का दबाव क्यों डाला गया?

बहरहाल 22 जून के नवभारत टाइम्स के इस खबर पर नज़र डालिए लिखा है – सेना भर्ती की ‘अग्निपथ योजना’ की घोषणा के बाद अवसाद में आकर युवक ने उठाया गलत कदम, दे दी जान. ये खबर जयपुर की है. सेना में भर्ती की ‘अग्निपथ योजना’ की घोषणा के बाद कथित रूप से अवसाद में आकर झुंझुनू जिले में 19 वर्षीय युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने यह जानकारी दी है। मृत युवक अंकित के चाचा लेखराज द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने बताया कि वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था और अग्निपथ योजना की घोषणा के कारण तनाव में था। अंकित ने जो किया उसका समर्थन हम नहीं कर सकते और न ही समाज को करना चाहिए.

अब 17 जून के जागरण की इस खबर पर नज़र डालिए. लिखा है बरेली में सेना भर्ती की तैयारी कर रहे युवक ने किया आत्‍महत्‍या का प्रयास, दोस्‍त बोले- अग्निपथ योजना से था निराश. अब 20 जून के जागरण की इस ख़बर को देखिये, लिखा है राजस्थान में अग्निपथ योजना का विरोध जारी है। सोमवार सुबह भरतपुर जिले के बिलौठी गांव में एक युवक ने खेत में पड़े से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस के अनुसार 21 वर्षीय युवक कन्हैयालाल बारहवीं कक्षा पास कर सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा था। मृतक के स्वजनों ने पुलिस को बताया कि अग्निपथ योजना घोषित होने के बाद से युवक मानसिक अवसाद में था।

ऐसी कई खबरें हैं लेकिन हम युवकों द्वारा उठाये गये इस कदम का समर्थन नहीं करते. सरकारे कई योजनायें लेकर आती हैं, अब गुरुवार को ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी को करीब 1800 करोड़ रूपये के कई परियोजनाओं का उपहार दिया, पहले भी उन्होंने कई उपहार दिए हैं, आज वाराणसी में रिंग रोड है, विश्वनाथ कोरिडोर है, हो सकता है कुछ योजनाओं पर आपकी सहमती न हो तो आप अपने जनप्रतिनिधि से वार्ता कर सकते है, सवाल कर सकते हैं. किसी भी समस्या का समाधान आत्महत्या नहीं हो सकता और ना ही हिंसा हो सकता है. जिंदगी बेहद अनमोल है। मुश्किल वक्त हर किसी के जीवन में आता है, लेकिन थोड़ा हौसला और हिम्मत रखने से यह निकल भी जाता है। कुछ लोग जिंदगी की मुश्किल घड़ी में आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। मगर डिप्रेशन या तनाव पर समय रहते काबू पा लिया जाए, तो जिंदगी में उम्मीद का नया दरवाजा खुल जाता है।

और रही बात हिंसा की तो उसका अंजाम जेल है. कानून से खिलवाड़ करके, अपने देश के संपत्तियों को नुकसान पहुंचाकर आप अपना भविष्य नहीं बना सकते. हमारे संवादाता हसीन अंसारी ने बताया कि गाजीपुर जनपद में अग्निपथ योजना के विरोध में बवाल के मामले में आरपीएफ ने मास्टर माइंड समेत 2 को गिरफ्तार किया है।मामले की जांच कर रही आरपीएफ की टीम ने बवाल के मास्टर माइंड अजय यादव को उसके साथी अशरफ शाह समेत शहर के विशेश्वरगंज इलाके से गिरफ्तार किया है।बताया जा रहा है कि गिरफ्तार अजय यादव ने बवाल के लिए युवाओं को भड़काया था।अजय यादव नोनहरा क्षेत्र का रहने वाला है,और आर्मी भर्ती के लिए कोचिंग चलाता है।वो युवाओं को बतौर कोच फिजिकल ट्रेनिंग देता है।अजय यादव ने सोशल मीडिया के जरिये युवाओं को अग्निपथ योजना के विरोध में एकत्र किया,और बवाल के लिए भड़काया।जिसके चलते उपद्रवियों ने 19 जून को बंजारीपुर इलाके में सारनाथ एक्सप्रेस पर पथराव किया था।

अब एक गुरु को ऐसा करने की जरुरत कहाँ से आन पड़ी. ये अंग्रेजो का युग थोड़ी है? हमारे देश को कितने संघर्षों के बाद आज़ादी मिली, इस देश को एकता के सूत्र में बाँधा गया, देश का विकास हुआ और आप हिंसा करके देश को ही नुकशान पहुँचाना चाहते हैं. ये बिलकुल उचित नहीं है की आप खुद हिंसा करें और हिंसा के लिए भड़काएं. विरोध संवैधानिक ढंग से किया जाना चाहिए. प्रधानमंत्री के मुताबिक, “आजादी के बाद शिक्षा नीति में थोड़ा बहुत बदलाव हुआ, लेकिन बहुत बड़ा बदलाव रह गया था. अंग्रेजों की बनाई व्यवस्था कभी भी भारत के मूल स्वभाव का हिस्सा नहीं थी और न हो सकती. नए भारत के निर्माण के लिए नई व्यवस्थाओं का निर्माण, आधुनिक व्यवस्थाओं का समावेश उतना ही जरूरी है. जो पहले कभी भी नहीं हुआ, जिनकी देश पहले कभी कल्पना भी नहीं करता था, वो आज के भारत में हकीकत बन रहे हैं.”

एक तरफ देश के प्रधानमंत्री देश में आधुनिक व्यवस्थाओं के समावेश को जरुरी बता रहे हैं और दूसरी गाजीपुर में पकडे गये गुरु जी आधुनिक व्यवस्था यानि सोशल मीडिया का दुरपयोग करके युवाओं को भड़का रहे थे.

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