Special Report | राजनीति भी एक दिलफेक आशिक के प्यार की तरह होती है. कभी किसी से मोहब्बत बेशुमार हो जाती है और जब प्यार अंजाम तक न पहुंचे तो नफरती तकरार हो जाती है. एक नज़र में प्यार होना, फिर ब्रैक उप हो जाना और फिर उसी से प्यार होना, ये राजनीति सबसे ज्यादा अपडेट होने वाला फार्मूला है और अब राजनीति इतनी एडवांस हो गई है की आजकल दुसरे के प्यार को तोड़कर ख़ुद का परिवार भी बसा लेती है, भले ही ये रिश्ता चाँद महीनों या सालों का ही क्यों न हो.

बहरहाल यूपी में सपा की राजनीति का हाल भी गजब हो चला है. ओम प्रकाश राजभर ने भाजपा से रिश्ता तोड़ सपा से रिश्ता जोड़ लिया, पुरे यूपी में मजबूत इस मजबूत रिश्ते की खूब चर्चाएं हुईं. हाँ ये भी बात सही है कि बिच में ओम प्रकाश राजभर का ओवैसी साहब से सम्बन्ध बना था, लेकिन सपा ने बुरा नहीं माना और राजभर को अपना बना लिया. लेकिन विधानसभा चुनाव में इनके प्यार को जनता का भरपूर प्यार नहीं मिला. अभी इनका प्यार इस दर्द से उभरा भी नहीं था कि लोकसभा के उपचुनाव में जनता ने इनके जख्म पर मरहम की नमक लगाने का काम कर दिया. अब भैया ये तो चुनाव है हार जीत लगी रहती है लेकिन लगता है की पियरका चाचा अब गरमा गये हैं, उपचुनाव में हार का ठीकरा उन्होंने अखिलेश यादव के ऊपर फोड़ दिया. उन्होंने कहा की अखिलेश यादव वातानाकूलित कमरे में बैठे थे और प्रचार करने भी नहीं गये. लगातार अखिलेश यादव पर बयान देने से भी सपा भी नाराज हो गई. नाराज हो भी क्यों न? खुल्लम खुला प्यार और खुल्लम ए खुल्ला तिरस्कार?

खैर समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान सपा सुप्रीमो अखिलेश योगी सरकार पर हमलावर दिखे, साथ ही उन्होंने पत्रकारों के कई सवालों का जवाब भी दिया. इस दौरान अखिलेश ने आरोप लगाया कि मौजूदा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को ‘कुछ ताकतें’ पर्दे के पीछे से चला रही हैं.

इस मौके पर एक पत्रकार ने सपा अध्यक्ष से सुभापसा के मुखिया ओम प्रकाश राजभर की नाराजगी को लेकर एक सवाल पूछा. वहीं, अखिलेश ने सवाल के जवाब में खुलकर कहा, “आजकल राजनीति पीछे से ऑपरेट हो रही है. कई बार पीछे से ऑपरेट होने के चलते लोग बयान दे देते हैं.”

आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा के हाल में हुए उपचुनाव में सपा की पराजय के बारे में पूछे जाने पर अखिलेश ने आरोप लगाया, “हमें पार्टी संगठन पर पूरा भरोसा है, लेकिन यह नहीं मालूम था कि अधिकारी मतदाताओं को वोट नहीं डालने देंगे, पैसे बंटवाएंगे, पार्टी के मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट से जानबूझकर काट देंगे.” वहीँ उपचुनाव में प्रचार के लिए खुद के नहीं जाने का कारण स्पष्ट करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि दोनों क्षेत्रों के सपा पदाधिकारियों ने भरोसा जताया था कि उन्हें जीत हासिल हो जाएगी. उन्हें प्रचार के लिये आने की जरूरत नहीं है.

अखिलेश यादव (Akhilesh yadav) ने सपा और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ मिलकर 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ने की अपने सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर की सलाह को खारिज करते हुए मंगलवार को कहा कि सपा को किसी की सलाह की जरूरत नहीं है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि ”समाजवादी पार्टी को किसी की सलाह की जरूरत नहीं है.” इस सवाल पर कि राजभर सपा नेतृत्व की कार्यप्रणाली को लेकर नाराज हैं, पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा ”अब कोई नाराज है तो मैं उसके लिये क्या कर सकता हूं.” अखिलेश यादव ने आगे कहा- आजकल जो राजनीति दिखती है वह है नहीं. कई बार राजनीति पीछे से संचालित होती है.”

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश को वातानुकूलित कमरे से बाहर निकलकर सड़क पर संघर्ष करने की सलाह दी थी. पिछले दिनों उन्होंने यह भी कहा था कि सपा और बसपा को वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ना चाहिये. उनकी दलील थी कि जब दोनों ही दल पिछड़ों और वंचितों की लड़ाई लड़ रहे हैं तो फिर चुनाव अलग-अलग क्यों लड़ते हैं. हालांकि सपा और बसपा ने वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था. बसपा को 10 और सपा को पांच सीटों पर कामयाबी मिली थी.

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