गाजीपुर। जिला अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा आए दिन मरीजों के इलाज में लापरवाही की घटनाएं सामने आती रहती हैं इसी क्रम में पंजाब केसरी की टीम रविवार को सुबह 11:00 बजे जिला अस्पताल पहुंचे जहां इमरजेंसी में मरीजों से इलाज के संबंध में जानकारी प्राप्त की बातचीत के क्रम में रेवतीपुर निवासी कृष्ण कुमार राय ने बताया कि वह रात 10:00 बजे से आए हुए हैं और उनका मरीज छत से गिरा हुआ है उसे गंभीर चोट आई है बावजूद इसके अभी सुबह तक कोई सर्जन या फिर सीनियर डॉक्टर देखने नहीं आया यह अस्पताल सिर्फ नर्सों के भरोसे ही चल रहा है।

वहीं बिरनो थाना क्षेत्र के बद्दोपुर निवासी मनोज कुमार ने बताया कि वह चाउमीन बेचने का कार्य करते हैं उनका 3 वर्षीय भतीजा खेलते समय भगौने में खौल रहे पानी के संपर्क में आ गया जिससे वह गंभीर रूप से झुलस क्या उसे जिला अस्पताल ले जाया गया जहाँ इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर प्रत्यूष कुमार द्वारा मरहम लगाया गया और उपचार किया गया जबकि बच्चे को देखने के लिए कोई सर्जन घंटों उपलब्ध नहीं हुआ उन्होंने बताया कि उनका बच्चा 30% तक चल गया है और अभी हालत स्थिर बनी हुई है।
इन सब सवालों के बाद मीडिया की टीम ने इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर से बातचीत की और यह जाना की इमरजेंसी में जले मरीजों के उपचार हेतु कितने देर में सर्जन डॉक्टर उपलब्ध होते हैं इस पर जवाब देते हुए वहां मौजूद डॉक्टर नारायण पांडे ने कहा कि अमूमन सर्जन मौजूद रहते हैं लेकिन अभी डॉक्टर आ नहीं पाए हैं वह कुछ ही देर में पहुंच जाएंगे जिस पर मीडिया ने यह सवाल किया कि आखिर घंटो बीत जाने के बाद भी अभी तक कोई सर्जन डॉक्टर उस जले हुए मरीज का इलाज करने क्यों नहीं पहुंचा तो वहां मौजूद डॉक्टर इसका कोई खास जवाब नहीं दे सके।
मालूम हो कि गाजीपुर जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज से अटैच और जिला के स्वास्थ विभाग के आला अधिकारी दावा करते हैं की जिला अस्पताल जब से मेडिकल कॉलेज से जुड़ा है तो यहां अत्याधुनिक व्यवस्था है उपलब्ध हुई है कई सर्जन डॉक्टर सहित अन्य विशेषज्ञों की भरमार है बावजूद इसके जब मरीज इलाज के अभाव में दर-दर की ठोकरें खाता है तो आप समझ सकते हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जिला के आला अधिकारी और सरकार कितनी सजग और तत्पर है।

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