|| Special Report with Abhinendra || खबरें जागरूकता का आधार होती हैं. ख़बरों का अर्थ समझ कर नागरिक जागरूक बनता है और गलत चीजों से सावधान हो जाता है. एक एंकर के तौर पर जब मैं खबरें पढता हूँ तो यही सोचता हूँ कि इस खबर का अर्थ समझ कर दर्शक अवश्य ही जागरूक बनेगा, लेकिन ख़बरों पर आने वाले कमेंट से यह स्पष्ट हो जाता है कि फिलहाल दर्शक अपने मतलब की खबर धुंध रहा है उसे निष्पक्षता से कोई लेना देना नहीं. हिन्दी प्रदेश की खबरें कई बार आपको पिंजड़े में बंद कर देती हैं. ये पिंजड़ा इतना बड़ा है कि आप इससे निकल नहीं सकते. अगर निकल भी गए तो बिना संसाधनों के दूर तक नहीं चल सकते. सूचना औऱ समझ की कमी भी आपकी चाल को सुस्त कर देती है. 

बड़ी खबर ये है कि बीस साल के लंबे अंतराल के बाद आज केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 2002 में गुजरात दंगों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। गृह मंत्री ने एक साक्षात्कार में बताया कि इन दंगों के दौरान आखिर क्या हुआ। शाह ने कहा कि गुजरात दंगों को लेकर पीएम और भाजपा सरकार पर लगे सभी आरोप राजनीति से प्रेरित थे। उन्होंने इसे भाजपा और पीएम मोदी को बदनाम करने की एक योजनाबद्ध साजिश बताया। शाह का यह बयान सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के एक दिन बाद आया है जिसमें कोर्ट ने पीएम मोदी के खिलाफ गुजरात दंगों को लेकर याचिका को खारिज कर दिया।

लेकिन इस खबर का अर्थ आप कैसे समझेंगें क्योंकि चर्चाओं में उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे हैं, दोनों के बिच महाराष्ट्र की सत्ता हासिल करने की होड़ मची हुई. एकनाथ शिंदे के पक्ष में 38 विधायक हैं और वो गुवाहटी के फाइव स्तर होटल में हैं. अच्छा भोजन, पानी, सुख सुविधाओं वाले इस होटल में शिवसेना के 38 विधायक कई दिनों से ठहरे हुए हैं. खैर उसी असम में बाढ़ से हजारों लोगों का जीवन मुश्किल में हैं, सरकारी मदद से लोग संतुष्ट नहीं है. एनडीआरएफ ने बताया कि राज्य में 54.5 लाख से अधिक लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। 12 और लोगों की मौत की सूचना है। उन्होंने कहा कि मई के मध्य से अब तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 101 हो गई है। अधिकांश प्रभावित जिलों में ब्रह्मपुत्र और बराक नदियां अपनी सहायक नदियों के साथ उफान पर हैं। राज्य के कुल 36 जिलों में से 32 जिलों में भूमि का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है। हालांकि, कुछ जगहों पर बाढ़ का पानी कम हुआ है। असम में भाजपा की सरकार और गुवहाटी में शिवसेना के विधायकों के होने के सवाल पर असम के मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्वा सरमा का कहना की असम में आप भी घुमने आ आइये.

लेकिन इस ख़बरों से बड़ी खबर ये होनी चाहिए कि उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर के शादियाबाद के परेंवा गांव निवासी गिरफ्तार आइएएस रामविलास यादव की कोठी के अंदर बना सरकारी पंचायत भवन फाइव स्टार होटल की तरह है। दूसरे के गेट के अंदर सामुदायिक मिलन केंद्र, जहां तक पहुंचने की किसी को अनुमति नहीं है। आज तक ग्रामीणों ने पंचायत भवन व सामुदायिक भवन को देखा तक नहीं है। बिना आइएएस की अनुमति के पंचायत भवन व सामुदायिक भवन का ताला नहीं खुलता है। वहां रखवाली करने वाला चौकीदार सिर्फ सरकारी नुमाइंदों के लिए खोलते हैं। बाकी लोगों के लिए नोएंट्री है। बिना रामबिलास की अनुमति को किसी को अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं है।

ये बातें हम नहीं कह रहे हैं, इस खबर को दैनिक जागरण ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है. उत्तराखंड में आय से अधिक संपत्ति मामले में गिरफ्तार आइएएस रामबिलास यादव ने न सिर्फ सत्ता की नजदीकियों का फायदा उठाया, बल्कि पूर्वांचल के गांधी कहे जाने वाले सपा के कद्दावर नेता स्व. रामकरन दादा के नाम पर ट्रस्ट बनाकर समाजसेवा के लिए राजनेताओं से भी मोटी धनराशि लेते रहे। रामबिलास यादव ने पहले ट्रस्ट बनाया फिर रामकरन दादा के तत्कालीन एमएलसी बेटे विजय यादव से दोस्ती व रिश्तेदारी जोड़कर कई जनप्रतिनिधियों से उनकी निधि से भी रकम लेते रहे। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में समाजसेवा के लिए बने इस ट्रस्ट ने जिले में काम करने की बात तो दूर रामकरन दादा के गांव ईशोपुर में भी रत्ती भर काम नहीं किया। रामबिलास यादव के परेवा स्थित आवास के मुख्य द्वार पर बड़े-बड़े अक्षरों में स्व. रामकरन दादा मेमोरियल ट्रस्ट कुसुम उपवन लिखा हुआ है। रामकरन दादा का सपा में अच्छा-खासा दबदबा था।

दरअसल, दादा और रामबिलास यादव के परिवार में दूर की रिश्तेदारी भी थी। इस वजह से सपा की सरकार बनने पर रामबिलास यादव दादा के काफी करीब आ गए। नजदीकियां बढ़ने का ही नतीजा रहा कि दादा के निधन के बाद रामबिलास ने उनके नाम पर समाजसेवा के लिए ट्रस्ट बना डाला। दादा के बेटे विजय यादव ने ट्रस्ट की ओर से सामुदायिक मिलन केंद्र बनवाने के लिए नौ सितंबर, 2015 को 24 लाख रुपये ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को दिए थे। परेवा के ग्रामीणों का कहना है कि यह मिलन केंद्र भी रामबिलास के आलीशान आवासीय परिसर में ही है। इसके अलावा तत्कालीन विधायक सुब्बा राम व बलिया के एक जनप्रतिनिधि ने भी पंचायत भवन के लिए बड़ी रकम दी थी। इसके अलावा कई विधायकों ने अपनी निधि से ट्रस्ट को बड़ी धनराशि दी, लेकिन ट्रस्ट की समाजसेवा सिर्फ कागजों में ही सिमटी रही। रामकरन दादा के बेटे व पूर्व एमएलसी विजय यादव का कहना है कि रामबिलास यादव ने पिता के नाम पर ट्रस्ट बनाया था, लेकिन मैंने ट्रस्ट से कोई मतलब नहीं रखा। सिर्फ सामुदायिक मिलन केंद्र के लिए 24 लाख रुपये दिए थे। मिलन केंद्र रामबिलास के आवासीय परिसर में बनवाने के सवाल पर विजय यादव ने कहा कि इस बाबत मैंने कोई जांच नहीं की थी।

हैरानी की बात यह है कि परेंवा में आइएएस की कोठी के पहला गेट के अंदर दूसरे तले पर पंचायत भवन बना हुआ है। इसके बाद दूसरे गेट के अंदर सामुदायिक मिलन केंद्र है। दोनों में जाने के लिए दूसरा कोई रास्ता नहीं है। पंचायत भवन में बकायदा बेड, सोफा, स्टील की कुर्सियां लगी हुई हैं। पंचायत भवन किसी होटल से कम नहीं लगता है। इसमें सारी सुविधाएं हैं। हैरानी की बात यह है कि स्व. रामकरन दादा मेमोरियल ट्रस्ट के सामुदायिक मिलन केंद्र व पंचायत भवन का उदघाटन 27 नवंबर 2016 को होने का पत्थर लगा हुआ है, लेकिन लागत तक का जिक्र पत्थर पर नहीं किया गया है। बोर्ड पर अध्यक्ष रामविलास और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता बृजेश कुमार दूबे का नाम अंकित है। इसका उदघाटन तत्कालीन एमएलसी विजय यादव ने किया था।

ग्रामीणों का यहां तक कहना है कि उन्होंने क्षेत्र में जमीन के दाम बढ़ा दिए हैं। जमीन बिक्री की भनक मिलने पर वह अधिक दाम देकर खरीद लेते थे। कोठी वाली जमीन कुछ फेरबदल कर ली है और बाकी खरीदी है। अब घर की देखभाल उनके पट्टीदार शशिकांत यादव करते हैं। हालांकी शशिकांत यादव का कहना है कि वह सिर्फ घर की देखभाल करते हैं बाकी वह कुछ नहीं जानते हैं।

बीते 11 जून को आइएएस अधिकारी रामबिलास यादव के देहरादून व लखनऊ के अलावा जिले के परेंवा के पैतृक आवास पर उत्तराखंड विजिलेंस की टीम ने छापेमारी कर जांच की थी। कई घंटे की छानबीन के बाद टीम रिपोर्ट तैयार कर ले गई थी। सपा सरकार में लखनऊ विकास प्राधिकरण के सचिव और एडिशन डायरेक्टर मंडी परिषद भी रह चुके हैं। तत्कालीन सपा सरकार के करीबी अफसरों में शामिल रहे रामबिलास यादव कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे थे। प्रदेश में योगी सरकार के आते ही वह 2019 में अपने मूल कैडर उत्तराखंड लौट गए थे।

डीएम एमपी सिंह के निर्देश पर बीडीओ मनिहारी गुरुवार को जांच के लिए परेंवा पहुंचे थे। ग्राम प्रधान को भी बुलाया था। बावजूद इसके गेट खोलने में कर्मचारी ने काफी देर लगा दी।गेट खुलने के बाद अंदर पहुंचकर बीडीओ ने पंचायत भवन व सामुदायिक केंद्र को देखा। हालांकि बचाव करते हुए बीडीओ ने कहा कि पंचायत भवन खुला था। बीडीओ लीपापोती में जुटे रहे। हालांकि शाम तक उन्होंने डीएम को रिपोर्ट नहीं सौंपी थी।

Leave a Reply

error: Content is protected !!