IAS या IPS बनने के लिए एक छात्र कितना मेहनत करता है और ये कोई सामान्य बात नहीं होती. लाखों में से कुछ का ही सपना पूरा हो पाता है. जरा सोचिये जब किसी का बेटा IAS बनता है तो खुशियाँ केवल घर और पड़ोस में नहीं मनाई जाती बल्कि दूर दूर के वो रिश्तेदार भी सम्बन्ध बनाना शुरू कर देते जो कई वर्षों से सम्बन्ध से दूर रहते हैं. लेकिन सवाल ये है कि क्या कोई IAS इसलिए बनना चाहता है कि वो सरकार के राजस्व के साथ जनता का धन लुट कर अपने छोटे से परिवार के लिए महल बनवा सके. शायद ये हर IAS के साथ न हो लेकिन शायद एक ने तो समाज को बदनाम कर ही दिया?

सत्ता से सीधा सम्बन्ध और ऐसो आराम से भरी जिन्दगी, कुछ ऐसा हाल था उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर के रहने वाले IAS राम विलास यादव का. ये हम नहीं कह रहे, खबरें बोलती हैं.

12 दिन पहले आई ख़बरों ने IAS राम विलास यादव को चर्चाओं में ला दिया, जानकारी के मुताबिक, यूपी में गाजीपुर, गाजियाबाद व उत्तराखंड के ठिकानों पर भी विजि‍लेंस ने छापेमारी की है. यूपी में तैनात रहे उत्तराखंड काडर के आईएएस रामविलास यादव पूर्व की सपा सरकार के काफी करीब कहे जाते थे. रामविलास पूर्व में सचिव एलडीए और एडिशन डायरेक्टर मंडी परिषद रह चुके हैं. उन्होंने लखनऊ में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है. यूपी में जब भाजपा की सरकार आई तो उन्‍होंने अपनी तैनाती उत्तराखंड करा ली थी. मगर यूपी की योगी सरकार को उनकी अनियमितताओं के बारे में जानकारी मिल गई. इसके बाद उत्तर प्रदेश शासन ने ही उत्तराखंड में आईएएस अधिकारी के खिलाफ जांच कराने के लिए कहा है. रामविलास ग्राम विकास विभाग उत्तराखंड में सचिव के पद पर कार्यरत थे , लेकिन राम विलास यादव को बुधवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इतना ही नहीं, निलंबन से कुछ ही देर बाद उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया है।

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सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में योगी सरकार की ओर से पर्याप्त दस्तावेज भी उत्तराखंड सरकार को भेजे गए थे. जांच पूरी होने पर अनियमितताएं और आय से अधिक संपत्ति का मामला सही पाया गया है. इस पर विजिलेंस ने जांच शुरू की तो आईएएस रामविलास यादव ने सहयोग नहीं किया. उन्होंने शासन से भी कहा कि विजिलेंस उनका पक्ष नहीं सुन रही है. बता दें कि सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत कुमार मिश्रा की शिकायत पर उत्‍तराखंड विजि‍लेंस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दिया था.

मीडिया प्लेटफार्म पर प्रकाशित खबर में लिखा है कि आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में आरोपी आईएएस(निलंबित) रामविलास यादव बुधवार को ढाई साल के बाद विजिलेंस के सामने पेश हुए थे। इस मामले में डायरेक्टर विजिलेंस अमित सिन्हा ने बताया कि उन्होंने विजिलेंस अफसरों के किसी भी सवाल का वाजिब जवाब नहीं दिया। उनकी पत्नी को भी वहां पर बुलाया गया लेकिन उन्होंने भी आने से इनकार कर दिया।

विजिलेंस दफ्तर में करीब 13 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद आईएएस रामविलास यादव को गिरफ्तार कर लिया गया। विजिलेंस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। यादव ने किसी भी सवाल का वाजिब जवाब नहीं दिया है।

इसके लिए विजिलेंस उनकी पुलिस कस्टडी रिमांड (पीसीआर) भी मांगेगी। इसके लिए न्यायालय में बाद में प्रार्थनापत्र दिया जाएगा। आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में आरोपी आईएएस(निलंबित) रामविलास यादव बुधवार को ढाई साल के बाद विजिलेंस के सामने पेश हुए थे। इस मामले में डायरेक्टर विजिलेंस अमित सिन्हा ने बताया कि उन्होंने विजिलेंस अफसरों के किसी भी सवाल का वाजिब जवाब नहीं दिया। उनकी पत्नी को भी वहां पर बुलाया गया लेकिन उन्होंने भी आने से इनकार कर दिया। उनसे बुधवार देर रात करीब दो बजे तक पूछताछ की गई। इसके बाद 2.15 बजे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 

सभी कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद यादव को बृहस्पतिवार शाम करीब साढ़े पांच बजे विजिलेंस कोर्ट में पेश किया गया। उनके वकीलों ने ज्यूडिशियल कस्टडी रिमांड (न्यायिक अभिरक्षा) का विरोध किया। लेकिन, विजिलेंस की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय ने यादव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। न्यायालय परिसर से हिरासत में लेकर उन्हें सुद्धोवाला जेल ले जाया गया। शाम करीब साढ़े सात बजे उन्हें जेल में दाखिल किया गया। 

रामविलास यादव यूपी के जमाने से ही राजनीतिक लोगों में खासी पैठ रखते थे। इसी बात का गुमान था कि वह अक्सर कहते थे कि उन पर कोई हाथ नहीं डाल सकता। लेकिन, 2017 में उत्तराखंड आते ही यूपी सरकार ने उनके खिलाफ जांच कराने की संस्तुति कर दी थी। ढाई साल बाद विजिलेंस के सामने पेश हुए। उन्हें जवाब नहीं दिया। बृहस्पतिवार को जब उन्हें कोर्ट लाया गया तब भी उनके चेहरे पर सिकन तक नहीं थी। उनसे जब बात करने की कोशिश की तो उन्होंने अकड़ में बोला कि हम कुछ नहीं बोलेंगे। 

ख़बरों के अनुसार सूत्रों ने बताया कि सतर्कता विभाग की टीम ने उनके देहरादून, लखनऊ, गाजीपुर समेत कई ठिकानों पर छापा मारा था जहां उनके पास कथित रूप से आय से 500 गुना अधिक संपत्ति होने का पता चला। इस आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए राम विलास यादव ने उत्तराखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी । हालांकि, न्यायालय ने उन्हें इससे कोई राहत न देते हुए उन्हें सतर्कता के समक्ष बयान दर्ज कराने का आदेश दिया था।

उत्तराखंड के 22 वर्षों के इतिहास में तमाम आईएएस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। उनकी विभिन्न एजेंसियों ने जांच भी की है। लेकिन, यह पहला मौका है जब कोई आईएएस गिरफ्तार हुआ और फिर उसे जेल भेजा गया। इससे पहले एक पूर्व आईएएस भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त जरूर किए जा चुके हैं। 

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