गाजीपुर | ख़बरों के अनुसार बांदा जेल में पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) के खाने में जहर देकर मारा जा सकता है। मुख्तार के बेटे उमर अंसारी ने बांदा जेल में निरुद्ध पिता की सुरक्षा एवं अन्य सुविधाओं की मांग करते हुए गाजीपुर की अदालत में अर्जी दी है। जिसमें खाने में जहर देकर हत्या करने की बात कही गई है।

ख़बरों के अनुसार अपनी अर्जी में मुख्तार अंसारी के पुत्र ने कहा है कि पिता मुख्तार अंसारी से जेल में स्थित पीसीओ और टेलीफोन से बात होती है। बातचीत के दौरान पिता ने बताया है कि जेल के बैरक में वहां के डीएम और एसपी सहित एसओजी  टीम के सदस्य हथियारों से लैस होकर घूसना चाह रहे थे, लेकिन जेल प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। बावजूद जबरदस्ती बैरक में घुस गए।

उमर अंसारी ने अर्जी में कहा कि बांदा जेल (Banda Jail) में बंद पिता मुख्तार अंसारी की जान को खतरा है। उन्हें खाने में जहर देकर मार दिया जा सकता है। उमर ने बांदा जेल में सुरक्षा व्यवस्था एवं अन्य सुविधाओं के लिए आदेश पारित करने की प्रार्थना की है। कोर्ट ने इस बाबत अर्जी का अवलोकन करते हुए आदेश को सुरक्षित रख लिया।

ख़बरों के अनुसार अभी पिछले सोमवार की रात अचानक जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने बांदा जेल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दोनों अधिकारियों को मुख्तार अंसारी के साथ डिप्टी जेलर वीरेश्वर सिंह की संलिप्तता मिली। वहां बहार से लाया हुआ खाने का सामान भी मिला. डिप्टी जेलर ने निरीक्षण के समय न तो अधिकारियों का सहयोग किया और न ही किसी भी सवाल का जवाब दिया। इसकी रिपोर्ट डीएम ने महानिरीक्षक कारागार प्रशासन एवं सुधार लखनऊ को दी। 

डिप्टी जेलर और चार सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद डीआईजी जेल ने गोपनीय ढंग से बाँदा जेल की तलाशी ली। खासतौर से मुख्तार अंसारी के बैरक की तीन बार तलाशी ली गई और सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए। डीआईजी जेल सोमवार की रात डीएम की ओर से भेजी गई रिपोर्ट के बाद मंगलवार को जेल आ गए थे। पहले रात में जेल के सभी बैरकों की तलाशी ली गई और बुधवार को दिन में दो बार जेल की तलाशी ली गई।

दरअसल, गुरुवार को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम/एमपी एमएलए कोर्ट (गाजीपुर) रामसुध सिंह की अदालत में 21 वर्ष पुराने उसरी चट्टी हत्याकांड में सुनवाई हुई। मामले में आरोपी मिर्जापुर जेल में बंद त्रिभुवन सिंह की कड़ी सुरक्षा के बीच पेशी हुई।

तकनीकी कारणों से अभियोजन की तरफ से गवाह की गवाही नहीं हो सकी। गवाहों ने गवाही दर्ज करने के लिए एवं अपने जान का खतरा होने के संबंध में अर्जी दी। इसी क्रम में मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी ने बांदा जेल में निरुद्ध पिता की सुरक्षा एवं अन्य सुविधाओं की मांग करते हुए अर्जी दी।

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