गाज़ीपुर | सादात थाना क्षेत्र के टांडा गाँव का रहने वाला 48 वर्षीय सुखविंदर राम पिछले कई वर्षों से लुधियाना में रहकर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था. करीब चार दिन पहले ही वह घर आया था. बताया जा रहा कि रविवार की रात में ही सुखविदर के बड़े भाई की पुत्री की शादी थी। सुबह दुल्हन की विदाई वगरैह होने के बाद बहुत सारे रिश्तेदार घर पर ही थे। लेकिन उसके बाद सोमवार को सुखविंदर ने घर में फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी. इस घटना से सबका दिल दहल उठा. तरह तरह की चर्चाएं होने लगी. ये खबर मीडिया प्लेटफार्म पर भी प्रकाशित हुई. लेकिन सुखविंदर ने फांसी लगाई क्यों? आइये मीडिया प्लेटफार्म पर प्रकाशित खबर के आधार पर इस कहानी को समझते हैं.

ग्रामीणों के अनुसार सुखविंदर कई वर्षों से लुधियाना में काम करता था. घर आता जाता रहता था. सुखविंदर का बच्चा भी है. अपनों से दूर रहकर सुखविंदर को अपनों की याद तो आती ही होगी. चिंता होती होगी, कई सारे ख्याल आते होंगें. लेकिन इंसान का स्वाभाव ऐसा होता है कि उसने सोचने की क्षमता भी शायद उसके सामाजिक माहौल पर निर्भर हो जाती है. वो क्या सोचना चाहता है ये भी उसके उस ज्ञान से पैदा होता जो उसने अपने आस पास को देखकर सीखा हो या फिर वो लगातार जिन चीजों में रूचि रखता हो उससे भी उसके सोचने की क्षमता निर्धारित हो सकती है और कभी गलत सोच रखने वाले किसी साथी बन जायें तो वो कम सोचने की क्षमता रखने वाले इंसान के जीवन का सर्वनाश तो शायद कर ही सकते हैं.

तो क्या सुखविंदर के आत्महत्या का कारण उसकी सोच थी? खबर के अनुसार तो ग्रामीणों का शायद यही कहना है. सुखविंदर जब भी लुधियाना से अपने घर आता था तो शायद उखड़ा उखड़ा सा रहता था. कोई था जो उसको कुछ ऐसी बाते बताता था की उसकी सोचने की शक्ति शायद ख़त्म सी हो जाती थी. वो घर जाता और अपने पत्नी से झगड़ने लगता. ये सिलसिला चलता रहता था. शायद पति पत्नी दोनों एक दुसरे से उब चुके थे. इस झगड़े ने दोनों के जीवन के सुख चैन को छीन लिया था. अब शायद उन दोनों के बिच का प्रेम अपना दम तोड़ रहा था. अब सवाल था इन झगड़ों के पीछे के कारण क्या है? ऐसी कौन सी बात है जो कोई सुखविंदर को बताता और सुखविंदर के सोचने समझने की शक्ति ख़त्म हो जाती.

ग्रामीणों की माने तो पति-पत्नी के विवाद काफी पहले से ही चला आ रहा था। सुखविदर अपने पत्नी के चरित्र पर संदेह करता रहता था, वो पत्नी पर शक करता था और धीरे धीरे ये शक गहरा होता गया. शायद यही कारण था कि जब भी वह पंजाब से आता था तो कोई उसका कान भर देता था, जिससे पति पत्नी के बिच झगड़ा शुरू हो जाता था। लेकिन क्या इन बातों में सच्चाई थी? क्या सुखविंदर ने कभी भी अपनी पत्नी को विश्वास की नज़र से देखा? यदि सुखविंदर थोडा सा भी विवेक का प्रयोग किया होता तो सोमवार का वो दिन मातम में नहीं बदलता.

रविवार की रात सुखविंदर के बड़े भाई की लड़की की शादी थी, पूरा परिवार और नाते रिश्तेदार शादी के रस्मों में व्यस्त थे. लेकिन इधर सुखविंदर के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था. उस रात सुखविंदर और उसकी पत्नी के बीच शायद खूब झगडा हुआ. शायद दोनों ने अपना विवेक खो दिया होगा. शायद झगड़ा इतना गंभीर हो गया होगा की सोमवार को सुखविंदर की पत्नी को ऐसा कदम उठाना पड़ा होगा.

सोमवार की दोपहर सुखविंदर की पत्नी ममता अपने दोनों पुत्रों के साथ थाने पहुँच गई और पुलिस से शिकायत की. लेकिन उसको क्या पता था की उसके घर पर क्या हो रहा है. ममता अपने पति के कार्यों से अनजान पुलिस में शिकायत करवा रही थी और उधर सुखविंदर अपने जीवन का सबसे खतरनाक काम करने जा रहा था.

सुखविंदर को जानकारी हो चुकी थी कि उसकी पत्नी ममता दोनों बच्चों को लेकर पुलिस के पास गई है. शायद सुखविंदर के सोचने समझने की शक्ति ख़त्म हो गई, लेकिन वो साबित क्या करना चाहता था? इधर थाने में शिकायत कर पत्नी व बच्चे जब घर पहुंचे तो देखा कि दंरवाजा अंदर से बंद है। फिर थाने के उपनिरीक्षक जेपी सिंह मौके पर पहुंचे और दरवाजा तोड़ दिया, कमरे के अन्दर का नज़ारा देखकर सबके होश उड़ गए. सुखविंदर की पत्नी ममता ने ये कभी नहीं सोचा होगा कि जो पति उसपर शक करता था वो ऐसा भी कुछ कर सकता है। घर में शादी की खुशियां मातम में बदल चुकी थी. सुखविंदर ने अपने कमरे का दरवाजा बंद कर कुंडी में धोती से फांसी लगाकर अपने जीवन लीला को ख़त्म कर दिया था.

वैवाहिक रिश्तों में शक और धोखा, केवल एक रिश्ते के अंत कारण नहीं बनता बल्कि उसके साथ कईयों की जिन्दगी भी तहस नहस हो जाती है. किसी भी विवाद का अंत मौत नहीं हो सकता. विचार कीजियेगा…

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