पंजाबी सिंगर (Punjab Singer) सिद्धू मूसेवाला (Sidhu Moosewala) की हत्या की जिम्मेदारी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi) ने और इसके एक साथी गोल्डी बरार ( Goldy Barar) ने ली है. मूसेवाला पर हमलावरों ने 30 राउंड फायरिंग की थी. मर्डर (Murder) की इस सनसनीखेज घटना को लेकर लॉरेंस बिश्नोई नाम वाले फेसबुक पर हत्या की जिम्मेदारी ली गई है.

Lawrence bishnoi wikipedia hindi: जैसा लॉरेंस नाम वैसे ही चेहरे पर चमक. चाहे जेल में रहे. या फ़िर पुलिस कस्टडी में. जन्म 22 फरवरी 1992. शहर पंजाब का फजिल्लका. लॉरेंस विश्नोई नाम उसकी मां ने रखा था. इस नाम के पीछे एक वजह भी थी.

क्योंकि वो पैदा होने पर बिल्कुल दूध की तरह सफेद चमक रहा था. लॉरेंस.. एक क्रिश्चियन नाम है. जिसका मतलब होता है सफेद चमकने वाला. बचपन में जिस तरह से वो स्मार्ट और खेल में दिलचस्पी लेता था, उसे देखकर तो घरवाले यही सोचते थे कि एक ना दिन ये हमारा नाम ज़रूर रोशन करेगा.

लेकिन उन्हें क्या पता था कि नाम रोशन तो करेगा लेकिन खेल की दुनिया में नहीं, बल्कि जरायम की दुनिया में. वो जुर्म जिसके ख़िलाफ कभी उसके पिता हुए करते थे. मां भी विरोध करती थी. क्योंकि पिता ख़ुद एक पुलिसवाले रहे. मां पढ़ी-लिखी. घर में करोड़ों की संपत्ति. लेकिन बेटा एक दिन भटककर जरायम की दुनिया में एंट्री कर जाएगा. शायद ही मां-बाप ने कभी सोचा हो.

अब इसका जुर्म की दुनिया में सिर्फ़ नाम ही नहीं बल्कि सिक्का जम चुका है. ऐसा सिक्का जिसे हिलाना अब किसी के बस की बात नहीं. क्योंकि उसकी जुर्म की कहानी उसकी उम्र से कई गुना ज्यादा है. इस लॉरेंस बिश्नोई की उम्र तो सिर्फ़ 28 साल है लेकिन अपराध का ग्राफ 50 पार कर चुका है.

अब इसका जुर्म की दुनिया में सिर्फ़ नाम ही नहीं बल्कि सिक्का जम चुका है. ऐसा सिक्का जिसे हिलाना अब किसी के बस की बात नहीं. क्योंकि उसकी जुर्म की कहानी उसकी उम्र से कई गुना ज्यादा है. इस लॉरेंस बिश्नोई की उम्र तो सिर्फ़ 28 साल है लेकिन अपराध का ग्राफ 50 पार कर चुका है.

Why Lawrence Bishnoi became Criminial gangster : क्राइम की दुनिया में लॉरेंस बिश्नोई के आने की वजह बनी चंडीगढ़ में कॉलेज के दिनों में हुई लड़ाई. असल में कॉलेज यूनियन को लेकर दो गुटों में लड़ाई हुई. दरअसल, दिखने में स्मार्ट. अच्छे पैसे वाला. शरीर से पूरी तरह फिट. इसे देखकर दोस्तों ने उसे कॉलेज में चुनाव लड़ने के लिए तैयार करा लिया. लेकिन लॉरेंस की बचपन की एक आदत रही.

वो जो कुछ करता था बड़ी शिद्दत और प्लानिंग से करता था. अब चुनाव लड़ना था तो उसने पहले एक ग्रुप बनाया. उसका नाम रखा स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन ऑफ पंजाब यूनिवर्सिटी यानी सोपू (SOPU). ये संगठन आज भी है. भले इसे बनाने वाला आज जेल में है.

तो लॉरेंस बिश्नोई ने पहले संगठन बनाया. उससे छात्रों को जोड़ा और फिर कॉलेज में अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा. जीतने के लिए खूब मेहनत की लेकिन नतीजा कुछ और निकला. वो चुनाव हार गया. लेकिन उसे हारने की आदत नहीं थी. लिहाजा, वो इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था. गुस्से में उसने रिवॉल्वर खरीद ली.

अब जब हाथ में हथियार आ जाए तो फिर ग़ुनाह की दुनिया कब तक दूर रह सकती है, ये कोई नहीं जानता. लॉरेंस के साथ भी ऐसा ही हुआ. और वक़्त जल्द ही आ गया. फरवरी का महीना और साल 2011. एक दिन लॉरेंस बिश्नोई का सामना उसे चुनाव में हराने वाले विरोधी उदय गुट से हुआ.

फिर क्या था. दोनों एक दूसरे के सामने थे. और फिर दोनों में भिड़ंत हो गई. गुस्से में लॉरेंस ने दूसरे गुट पर फायरिंग कर दी. ये पहली बार था, जब लॉरेंस ने फायरिंग की थी. मामला तूल पकड़ा और इधर पुलिस ने केस दर्ज किया.

फरवरी 2011 में लॉरेंस बिश्नोई पर पहली एफआईआर दर्ज हुई थी. इसके बाद तो इस एफआईआर से बचने और दूसरे गुट को सबक सिखाने के लिए उसने एक गैंगस्टर से हाथ मिला लिया. फिर तो वो टी-20 मैच की तरह क्राइम में खेलने लगा और जुर्म की दुनिया में अर्धशतक भी लगा लिया.

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