सोशल मीडिया में महंगाई, शिक्षा और रोजगार को लेकर लिखने वालों को देखकर लगता है कि ज़्यादातर बीजेपी के विरोधी दलों के समर्थक या कार्यकर्ता हैं. महंगाई को लेकर मिडिल क्लास की आवाज़ गायब सी नज़र आती है. टीवी पर महंगाई, शिक्षा रोजगार की चर्चा मिशन नहीं है, न ही टैगलाइन में मिशन महंगाई वापसी है लेकिन मिशन मान्यूमेंट वापसी एक नया टैगलाइन चलाया जा रहा है. ऐसे टाइटल कहां से आते हैं? क्या ट्विटर पर चलने वाले हैशटैग को उठाकर टीवी के स्क्रीन पर चिपका दिया जाता है? तो फिर रोजगार और शिक्षा को लेकर जो हैश टैग ट्रेंड करते हैं उन्हें मिशन क्यों नहीं बनाया जाता?

कुछ ऐसा ही माजरा उत्तर प्रदेश का है. उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर में सडकें हैं लेकिन चौड़ी नहीं हैं, दुरुस्त नहीं हैं, एक्सप्रेस वे तो बन गया लेकिन बस अड्डा नहीं बना, कृषि मंडी नहीं बनी. एक्सप्रेस वे या हाईवे से जनपद के कनेक्टिविटी वालीं सड़कों हालत गंभीर है, ऐसी सडकें दुर्घटना में शिकार हुए जनपदवासियों के खून से रंगी हुई हैं. हजारों बेरोजगार है लेकिन इंडस्ट्री नहीं है. हो भी कैसे एक बारिश और आंधी में बिजली विभाग के एक दुसरे झप्पी पाए इतराते तार अपना दम तोड़ देंगें, फिर उनके इलाज में घंटों लग जायेगा, ऐसे में इंडस्ट्री को वेंटिलेटर पर कितना चलाया जा सकेगा. यहाँ 300 से ज्यादा कॉलेज हैं, बड़ी जनसँख्या हैं, लेकिन विश्विद्यालय नहीं है.

यह मात्र व्यंग नहीं है, यह यहाँ के स्थानीय प्रशासनिक व्यवथा और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का काला चिठ्ठा है. युवाओं के शायद ये मुद्दे अब मुद्दे नहीं रहे. शायद उनके लिए अहम् मुद्दा धर्म के रंग में रंग कर हिंसा को मजबूत करना बन गया है. अभी अभी वक़्त है जमीनी मुद्दों को मजबूत कर अपने और अपने समाज के विकास में योगदान देने का, नहीं जिस पॉकेट से पैसे, खेत से अनाज और थाली से रोटी ख़त्म हुई, उस दिन ये हिंसा पुरे समाज को ख़त्म कर देगी.

खैर इस बिच कुछ युवा जनप्रतिनिधि और छात्र हैं जो अपने समाज की लड़ाई को सड़क से सदन तक लड़ने का प्रयास कर रहे हैं. गाजीपुर स्थित पीजी कॉलेज के छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय, अपने सैकड़ों सहयोगियों संग मिलकर लम्बे समय से जनपद में विश्विद्यालय की मांग को प्रमुखता उठा रहे हैं. उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कई बार पत्रक दिया लेकिन मांग पूरी न हो सकी, पूर्व सहकारिता राज्य मंत्री ने छात्रों की मांग ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विश्वविद्यालय स्थापना के लिए पात्र लिखा था लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं, यहाँ तक की बीते विधानसभा चुनाव में भी इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं उठाया गया. लेकिन छात्र नेता दीपक उपाध्याय और उनके साथियों ने हार नहीं मानी वो मागों को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने लखनऊ पहुंचे, वहां उन्होंने पत्रक तो दे दिया लेकिन नतीजा शून्य रहा.

विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का आगमन गाजीपुर में हुआ तो उस दौरान दीपक और उनके सहयोगियों ने अखिलेश यादव को विश्विद्यालय स्थापना की मांग का पत्रक सौंपा तो अखिलेश यादव ने आश्वाशन दिया की हमारी सरकार बनेगी तो ये मांग जरुर पूरी होगी. खैर अखिलेश सत्ता में तो नहीं आ सके लेकिन गाजीपुर में समाजवादी पार्टी ने अपना परचम लहरा दिया, जनपद की सातों विधानसभा सीट सपा के खाते में गई.

इस बिच योगी सरकार के दुसरे कार्यकाल का पहला बजट आया और बजट पे चर्चा हुई तो पहली बार गाजीपुर के विधायकों को बोलने का मौका मिला, तो फिर क्या था विधायकों ने प्राथमिकता देते हुए पहली ही बार में विश्वविद्यालय स्थापना की मांग को गंभीरता से उठाया और केवल विश्वविद्यालय ही नहीं कृषि मंडी, दूध की डेरी, अन्तरराज्यीय बस अड्डे, कन्या डिग्री कॉलेज, बने हुए ट्रामा सेण्टर को चालू करवाने, प्रस्तवित स्टेडियम और पॉवर हाउस को बनवाने की मांग रख दी.

सदन में मोहम्दाबाद के विधायक शोयब उर्फ़ मन्नू अंसारी ने कहा कि 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश ने जब पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का शिलान्यास किया था तब उस वक़्त वहां कृषि मंडी, दूध की डेरी, अन्तरराज्यीय बस अड्डा बनाना था जो नहीं बन सका, अत: उसका निर्माण करवाया जाये, उन्होंने कहा कि मोहम्दाबाद विधानसभा में कन्या डिग्री कॉलेज की आवश्यकता और वहां 2 साल से ट्रामा सेण्टर बना हुआ है लेकिन उसमे डॉक्टर नहीं हैं, कृपया उसे शुरू करवाया जाये.

वहीँ जंगीपुर के विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव ने बजट सत्र के दौरान विश्वविद्यालय स्थापना की मांग को प्रमुखता से रखा और वित्त मंत्री से बजट में गाजीपुर में विश्वविद्यालय स्थापना को शामिल करने की मांग भी की। इसके अलावा गाज़ीपुर-मऊ फोरलेन से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी को देखते हुए भड़सर क्षेत्र में एक बस स्टैंड के निर्माण की मांग भी विधानसभा के पटल पर रखी। साथ ही सपा सरकार में गाजीपुर के लिए प्रस्तावित स्टेडियम की स्थापना एवं जंगीपुर क्षेत्र में एक मिनी स्टेडियम के निर्माण की मांग और बौरी में 33/11केवीए एवं बोगना में 132 केवीए पावर हाउस की स्थापना समेत कई जन मुद्दों को सदन के पटल पर रखा।

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