मुद्दे खुद ब खुद नहीं बनते, मुद्दे जनसमस्याओं से पैदा होते हैं. कौन सा मुद्दा जनता के लिए सही है और कौन सा गलत? ये जनता खुद तय करती है. एक बुद्धिजीवी केवल जनता को जागरूक कर सकता है. कम समझ या कम जानकारी रखने वाले वर्ग को सही जानकारी देना और उसे समझाना, पत्रकारिता का मुख्य बिंदु होने चाहिए.

भूख रोटी से मिटती है, रोटी बनाने के लिए चूल्हे की जरुरत होती है, रोटी और चूल्हा पाने के लिए पैसों की जरुरत होती, पैसों के लिए नौकरी या रोजगार की जरुरत होती है, निरंतर रोजगार करने किये लिए सफ़र करना पड़ता है, व्यक्ति अपने घर से अपने इश्वर की आराधना करने के बाद नौकरी या रोजगार पर जाता है. चाहे घर ऑफिस तक जाने के लिए बाइक या कार का इस्तेमाल किया जाये या ऑटो रिक्शा या बस का इस्तेमाल किया जाये. दोनों ही केस में इधन खर्च होता है. इधन का दाम निर्धारित करता है आपके महीने का खर्च क्या होगा? फिर आप निर्णय ले पाते हैं कि आपको कितनी रोटी खानी है?

अब इस जीवन चक्र में आपके पास इश्वर तो हैं लेकिन रोजगार या नौकरी पड़ता है. तभी जाकर रोटी, मकान और गाड़ी आता है. यहाँ मुद्दा रोजगार और महंगाई का है.

लेकिन अब दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University Professor Ratan Lal) के प्रोफेसर रतन लाल को देख लिए, उन्होंने ज्ञानवापी पर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट क्या किया उनपर मुकदमा हो गया. रतन लाल प्रोफेसर हैं यानि गुरु. जिनके पास ज्ञान है और वो ज्ञान छात्रों में बाटते हैं.

खैर मीडिया प्लेटफार्म पर प्रकाशित खबर के अनुसार ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट से जुड़े केस में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट (Tees Hazari Court) ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर रतन लाल को शनिवार को जमानत दे दी. कोर्ट ने रतन लाल को जमानत देते हुए कहा, ” किसी व्यक्ति द्वारा महसूस की गई चोट की भावना पूरे समूह या समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती है और आहत भावनाओं के बारे में ऐसी किसी भी शिकायत को तथ्यों के पूरे स्पेक्ट्रम पर विचार करते हुए इसके संदर्भ में देखा जाना चाहिए.” 

हालांकि, कोर्ट ने ये भी कहा कि रतन लाल को ऐसी पोस्ट से बचना चाहिए. अब जमानत के दौरान वो ना कोई पोस्ट करेंगे और न ही इंटरव्यू देंगे. गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किए रतन लाल को पुलिस ने शनिवार को कोर्ट में पेश किया था.   

पुलिस की दलील पर जज ने पूछा कि सोशल मीडिया में पोस्ट कब किया गया? आगे अगर इसे सोशल मीडिया पर डिस्कस किया जाएगा तो क्या हर बार नया अपराध माना जायेगा? इसका जवाब देते हुए पुलिस ने कहा कि केवल यही पोस्ट नहीं बल्कि आरोपी ने यूट्यूब पर भी अपने पोस्ट को सही ठहराया. इस पर जज ने पूछा कि ऐसे कितने वीडियो हैं? 

अदालत को जवाब देते हुए पुलिस ने कहा कि दो वीडियो हैं. ऐसे में आरोपी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत पर भेजा जाए. जबकि रतन लाल के वकील ने कहा कि मामले में कोई केस ही नहीं बनता है. गिरफ्तारी छोड़िए, इनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज नहीं होनी चहिए. अभी तक सोशल मीडिया पोस्ट से कोई हिंसा नहीं हुई है. ऐसे में पुलिस सेक्शन 153A कैसे लगा सकती है. अगर किसी व्यक्ति की सहनशक्ति कम है, तो उसके लिए रतन कैसे ज़िम्मेदार हो सकते हैं. भारत एक लोकतांत्रिक देश है. यहां हर किसी को बोलने की आजादी है. ये एफआईआर रद्द होनी चाहिए. ऐसे में दोनों पक्षों की दलीलों को सुनते हुए कोर्ट ने रतन को जमानत दे दी.

लेकिन आपके लिए मुद्दा क्या है? प्रोफेसर रतन लाल या महंगाई?

बढती महंगाई के बिच केंद्र सरकार ने बड़ा एलान किया है. ख़बरों के अनुसार केंद्रीय वित्त मंत्री निर्माला सीतारमण ने ट्वीट कर जानकारी दी कि सरकार पेट्रोल (Petrol) पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise Duty) ₹8 प्रति लीटर और डीजल (Diesel) पर ₹6 प्रति लीटर कम कर रही है.

शनिवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्माला सीतारमण (Central Finance Minister Nirmala Sitaraman) ने इस संबंध में ट्वीट कर जानकारी दी है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ” हम पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क ₹8 प्रति लीटर और डीजल पर ₹6 प्रति लीटर कम कर रहे हैं. इससे पेट्रोल की कीमत 9.5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 7 रुपये प्रति लीटर कम हो जाएगी. इसका सरकार के लिए लगभग ₹ 1 लाख करोड़ प्रतिवर्ष का राजस्व निहितार्थ होगा.”

वहीं, घरेलू गैस के संबंध में उन्होंने कहा, ” साथ ही इस वर्ष हम प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना के 9 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को ₹ 200 प्रति गैस सिलेंडर (12 सिलेंडर तक) की सब्सिडी देंगे. इससे हमारी माताओं और बहनों को मदद मिलेगी. इससे सालाना लगभग ₹6100 करोड़ का राजस्व प्रभावित होगा.”

निर्मला सीतारमण ने कहा, ” पीएम मोदी  ने जब से जिम्मा संभाला है, केंद्र सरकार गरीबों के कल्याण के लिए समर्पित. हमने गरीबों और मध्यम वर्ग की मदद के लिए कई कदम उठाए हैं. नतीजतन, हमारे कार्यकाल के दौरान औसत महंगाई पिछली सरकारों की तुलना में कम रही है.”

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