मुक़दमा या ऍफ़आईआर, इन शब्दों का आपके जीवन से क्या ताल्लुक है. किसी के ऊपर मुकदमा होना या आपके ऊपर मुकदमा होना, जब ऐसी बाते आपके सामने आती हैं तो आपको क्या महसूस होता है. आप डर जाते हैं या कहते हैं कर लो मुकदमा जितना करना है. “कर लो मुकदमा जितना करना है” ये बात दो सन्दर्भों में कही जाती है पहला ये की कोई क्रिमिनल मानसिकता है तो वो ये बातें कहे या फिर वो जिसके ऊपर बेवजह मुकदमा कर दिया गया हो या उसका दुरपयोग किया गया हो .

आपने रास्ते दो मोटरसाइकल वालों को लड़ते देखा ही होगा, तो क्या उनकी लड़ाई थाने तक पहुँच जाती है या मामला वहीँ ख़त्म हो जाता है. कुछ गंभीर मामले होते हैं जब मामला थाने तक पहुँच जाये. इधर सुभासपा के अध्यक्ष और जहूराबाद विधानसभा से विधायक ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) अपनी पीड़ा को जिस तरह से बयां कर रहे हैं उससे तो यही लग रहा है कि दो मोटरसाइकिल सवारों की लड़ाई में ये घुन की तरफ पिस गये. उन्होंने शुक्रवार को गाजीपुर में धरना दिया और लखनऊ में वृहद् धरना करने की चेतावनी भी दे दी. बहरहाल आइये पुरे मामले को समझते हैं.

सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओपी राजभर पर कथित हमले के मामले को लेकर राजनीति गर्म हो चली है।इस मामले को लेकर सुभासपा अध्यक्ष ओपी राजभर समेत सपा के वरिष्ठ नेताओ ने ग़ाज़ीपुर (Ghazipur) सरजू पांडे पार्क में धरना प्रदर्शन किया। जिला प्रशासन के प्रतिनिधि को न्यायोचित कार्रवाई के संबंध में ज्ञापन देने के साथ ही राजभर ने अल्टीमेटम भी दिया।राजभर ने कहा कि अगर इस प्रकरण में जल्द कोई कार्रवाई नहीं की गई तो, 23 तारीख को वह लखनऊ में इस मसले पर वृहद आंदोलन करेंगे।

बताते चले कि करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के गौसलपुर गांव में ओपी राजभर पर मंगलवार को कथित हमला हुआ था।लेकिन पुलिस ने विधायक ओपी राजभर पर हमले को नकारते हुए इसे दो पक्षों के बीच छिटपुट विवाद बताया था।पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर ओपी राजभर समेत दोनों पक्षों के 32 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया था।फिलहाल सुभासपा अध्यक्ष ने इस मसले को विधानसभा में उठाने का ऐलान किया है।शुक्रवार के धरना प्रदर्शन में एसपी (Samajwadi Party) के राम गोविंद चौधरी,अम्बिका चौधरी,नारद राय आदि नेता मौजूद रहे।जबकि ग़ाज़ीपुर से एसपी एमएलए ओमप्रकाश सिंह, वीरेंद्र यादव,जयकिशुन साहू,मन्नू अंसारी,अंकित भारती धरने में शामिल रहें।इस दौरान सुभासपा और सपा नेताओं ने ओपी राजभर पर दर्ज केस वापसी और हमलावरो की गिरफ्तारी की मांग उठायी।

मीडिया से बात करते हुए ओपी राजभर ने कहा कि घटना वाले दिन उन्होंने घटनास्थल से ही पुलिस अधीक्षक के सीयूजी नंबर पर फोन किया। सीयूजी नंबर पर फोन करने पर फोन एसपी के पीआरओ ने फोन उठाया और पीआरओ की सूचना पर एसओ करीमुद्दीनपुर घटनास्थल पर पहुंचे। लेकिन वह खुद अपनी जान बचाने के लिए जद्दोजहद करने लगे। एक सवाल के जवाब में राजभर ने कहा कि वह घटना वाले दिन 45 मिनट तक वह घटनास्थल पर रुके थे। 45 मिनट बाद एसओ करीमुद्दीनपुर मौके पर पहुंचे। घटना होने के करीब डेढ़ घंटे बाद सीओ मुहम्मदाबाद घटनास्थल पर पहुंचे थे।2 घंटे के बाद एसपीआरए आए,तब तक क्या वह अपने ऊपर हमला होने देते ? वीडियो वायरल करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्होंने भड़काने के नियत से नहीं बल्कि अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को यह बताने के लिए वीडियो वायरल किया था कि वह असुरक्षित हैं और लोग उन्हें लाठी डंडा लेकर घेरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा गया है ।अगर कोई सकारात्मक परिणाम नहीं आया तो 23 तारीख को इस आंदोलन को लखनऊ में वृहद रूप दिया जाएगा। संसद से सड़क तक वह अपने सम्मान की लड़ाई लड़ेंगे।

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