(15 मई 100 वीं जयंती पर चौखट प्रणाम विशेष)

नेताजी सुभाष के सिपाही नज़ीर हुसैन भोजपूरी संस्कृति के पुरोधा थे

आजाद हिंद फौज के योद्धा नज़ीर महान सुभाषवादी थे अंत तक अंग्रेजो से माफी नही मांगी

वाराणसी, ग़ाज़ीपुर 14 मई । आजादी के पितामह नेताजी सुभाष चंद्र के आह्वान पर गाजीपुर के उसिया गांव का नौजवान नजीर हुसैन गुलाम भारत को अंग्रेजो से आजाद कराने के लिए आजाद हिंद फौज में शामिल हो गया। द्वितीय विश्व युद्ध मे जापान के हारने के बाद आजाद हिंद फौज के सिपाहियों को सिंगापुर में गिरफ्तार कर लालकिले लाया गया ताकि युद्ध के लिए उनको फांसी दिया जा सके। 

इधर गांव के लोग मान लिए कि नजीर हुसैन मर चुके हैं। जब ट्रेन से नजीर हुसैन को गिरफ्तार कर अंग्रेज दिल्ली ले जा रहे थे! उस समय हावड़ा दिल्ली रेलवे मार्ग पर दिलदारनगर जंक्शन रेलवे स्टेशन से पहले ट्रेन पहुँची थी कि नजीर हुसैन ने एक चिट्ठी लिखकर स्टेशन पर फेंक दिया। उसिया गांव के एक व्यक्ति को चिट्ठी मिली तब गांव में हल्ला हो गया कि नजीर हुसैन जिंदा है। गांव वाले ट्रेन का पीछा किये की नजीर हुसैन को छुड़ा लिया जाए। ट्रेन दिल्ली पहुँची, नजीर को लालकिले में कैद किया गया, सबको फांसी की सजा हो गयी। बाद में सबके छूटने के बाद नजीर छूटे तो गांव आये, लेकिन नेताजी सुभाष उनके जेहन से नही निकल पाए। नजीर हुसैन फिल्मी दुनिया मे चले गए जहां विमल राय के साथ मिलकर नेताजी के चरित्र पर 1950 में ‘पहला आदमी’ हिंदी फ़िल्म बनाये। भोजपुरी फ़िल्म के पितामह कहे जाने वाले जनक ही थे, प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद के कहने पर 1962 में ‘गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो’ भोजपुरी फ़िल्म बनाये। पूर्वांचल की संस्कृति और यहां के गांवों को अपनी फिल्मों में दिखाते रहे। हिंदी फिल्मों में भी स्वयं नजीर हुसैन ने नेता जी सुभाषचंद्र बोस और आजाद हिंद फौज का उल्लेख अभिनय कर धर्मेंद्र के साथ 1968 की फिल्म ‘आँखें’ में देश वासियों को दिखाया था।

अपनी जिंदगी को नेताजी सुभाष के नाम न्योछावर करने वाले नजीर हुसैन की 15 मई 1922 को जन्मे 100 वीं जयंती है। इस अवसर पर  सुभाषवादी दल भारतीय अवाम पार्टी के नेताओ ने राष्ट्रीय महासचिव कुँअर नसीम रजा ख़ाँ के नेतृत्व में नजीर हुसैन की जन्मस्थली उसिया गांव पहुँचकर उनकी चौखट को प्रणाम किया। चौखट पर मिले नजीर हुसैन साहब के भतीजे वयोवृद्ध शमसुद्दीन ख़ाँ मिले, उन्होंने अपने देशभक्त फौजी एवं महान फिल्मकार चाचा नजीर हुसैन की यादों को साझा किया। आजाद हिंद फौज के महान योद्धा एवं भोजपुरी संस्कृति के पुरोधा नजीर हुसैन ताउम्र सुभाषवादी रहे। इस महान सुभाषवादी के योगदान को देश कभी भुला नही पायेगा । 

भारतीय अवाम पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष नजमा परवीन ने केंद्र सरकार से मांग किया है कि नजीर हुसैन की जन्मस्थली को आजाद हिंद तीर्थ के रूप में विकसित किया जाए एवं नजीर हुसैन के नाम का स्मृति स्तम्भ उसिया गांव में लगाया जाए। संस्कृति मंत्रालय नजीर हुसैन के नाम पर भोजपुरी फ़िल्म पुरस्कार की घोषणा कर इस महान योद्धा को सम्मान दे। वहीं कुँअर नसीम रज़ा ने भारतीय डाक विभाग, भारत सरकार से आग्रह किया है कि भोजपुरी फिल्म के जन्मदाता के नाम तथा 100वीं वर्षगांठ जयंती के उपलक्ष्य पर विशेष डाक टिकट जारी किया जाए।

   इतिहास के नायकों को गुम करने का बहुत प्रयास कांग्रेस ने किया लेकिन नेताजी सुभाष की अमरगाथा और उसके नायको के इतिहास को कोई खत्म नही कर पाया। नजीर हुसैन अमर रहेंगे, पूर्वांचल के लोगो को हमेशा इस बात का गर्व रहेगा कि नजीर हुसैन हमारे क्षेत्र के है ।

नज़ीर हुसैन साहब के पुश्तैनी घर (हिफाज़ती दरवाज़ा) पर चौखट प्रणाम करते हुए पार्टी के पदाधिकारियों में ग़ाज़ीपुर के महासचिव अफरोज ख़ाँ, जमानियां विधानसभा महासचिव मुशर्रफ हुसैन खान, भारतीय अवाम युवा मोर्चा के उत्तर प्रदेश सचिव दानिश ख़ाँ राजपूत, भारतीय अवाम प्रेस परिषद के उत्तर प्रदेश सचिव गुलाम अली उर्फ शहजाद आदि मौजूद रहे।

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