साइबर क्राइम पुलिस वाराणसी ने मंगलवार को मुहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के सेमरा के रिटायर्ड पुलिस कर्मी से धोखाधड़ी के मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया है। पीड़ित उपेंद्र सिंह ने बताया कि 25 मार्च को ट्रैजरी के नाम पर फोन आया और उनसे खाता संख्या और मोबाइल पर मिलने वाले ओटीपी की जानकारी मांगी गई। जिसके बाद 10 ट्रांजेक्शन में 26 मार्च तक खाते से कुल 18 लाख रुपये निकल गया।

मालूम हो कि इस मामले में 20 अप्रैल को एक अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। मंगलवार को गिरफ्तार तीनों अभियुक्त बिहार के रहने वाले हैं। जिसमें रोहित सिन्हा सिविल लाइन बक्सर, दीपक कुमार निवासी अकौना जहानाबाद व अमित कुमार निवासी मटुआ गया की संलिप्तता पाई गई। इनके पास से चार मोबाइल फोन, 2720 रुपये नकग और विभिन्न खातों में करीब एक लाख रुपये सीज किया गया है।

अभियुक्तों को वाराणसी साइबर थाने के निरीक्षक विजय कुमार मिश्र, उप निरीक्षक सुनील कुमार यादव समेत सात सदस्यीय टीम ने गिरफ्तार किया है। इस संबंध में पिंडरा क्षेत्राधिकारी एवं नोडल अधिकारी साइबर क्त्रसइम अभिषेक पांडेय ने साक्ष्य संकलन और गिरफ्तारी के लिए निर्देशित किया था।
पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि हम सभी लोग सिम विक्त्रस्ेता है। बायोमीट्रिक थंब का दुरुपयोग कर षडयंत्रपूर्वक साइबर गैंग को यह सिम दिया जाता है। जो सिम साइबर गैंग को देते है। साईबर गैंग के द्वारा बड़ा काम होने पर इनाम भी दिया जाता है। गैंग में सभी का काम बंटा है। जैसे हम लोग सिम की व्यवस्था करते है। इसके लिए हम लोग सफाईपूर्वक दो सिम दो बार फोटो खींचकर, आधार कार्ड लेकर और थंब इंप्रेशन का दुरुपयोग करके एक एक्सट्रा सिम कस्टमर के नाम बिना उसकी जानकारी ले लेते है। उसी सिम को साइबर अपराध गैंग को बेच देते है।

अभियुक्तों का कहना है कि इस बार हम लोग पहली बार पुलिस के हत्थे चढे़ है। हम लोग सिम एक्टिवेट करते समय अल्टरनेट मोबाइल नंबर में अपने करीबी रिश्तेदार या दोस्त का मोबाइल नंबर डाल देते है। जिससे ओटीपी आने पर हम लोगो को पता चल जाता है और हम लोग अपने उद्देश्य मे सफल हो जाते है।

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