आज के वक़्त में जहाँ एक तरफा युवा नफरती भाषणों और नफरती खबर को देख कर अपने भविष्य के मुद्दे से भटक रहा है, जहाँ जातिवादी राजनीति में पड़कर युवा अपने भविष्य को अन्धकार में धकेल रहा रहा है, वही दूसरी तरफ गाजीपुर की धरती पर एक सख्स का जन्म हुआ जिन्होंने आने वाले कई पीढ़ियों का भविष्य बदल दिया.

आम इंसान के अंदर व्याप्त जुनून को अगर सही दिशा में लगाया जाए तो उसे खास बनने से कोई रोक नहीं सकता है। इसका उदाहरण स्व. तेजबहादुर सिंह हैं। हाकी के प्रति उनके जुनून ने उत्तर प्रदेश ही नहीं राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय फलक पर उन्हें पहचान दिलाई।

तेजू भइया के नाम से मशहूर रहे तेजबहादुर सिंह ने गांव की पगदंडियों पर चलने वाले युवाओं को राष्ट्रीय फलक का सितारा बना दिया। उनकी मेहनत व लगन की ही देन है कि आज ललित उपाध्याय व राजकुमार पाल सरीखे खिलाड़ी भारतीय हाकी टीम के खिलाड़ी हैं और उत्तम सिंह व राहुल राजभर जूनियर इंडिया टीम में अपनी छाप छोड़ रहे हैं।

वर्ष 1953 में करमपुर स्थित किसान मेंघबरन सिंह के घर जन्में तेजबहादुर सिंह जैसे-जैसे बड़े होते गए उनमें खेल के प्रति दिलचस्पी बढ़ती गई। पहले इनका झुकाव कुश्ती की तरफ हुआ तो लोगों ने इन्हें पहलवान का नाम दिया लेकिन हाकी खेल के प्रति धीरे-धीरे रुचि बढ़ती चली गई। रुचि कब जुनून में बदल गई इसका पता ही नहीं चला। करमपुर गांव में 1983 में तेजबहादुर सिंह ने हाकी की शुरुआत की। शुरुआती दौर में मिट्टी के मैदान पर लकड़ी की टहनियों को हाकी के रूप में इस्तेमाल कराना शुरू कर दिया। इन्होंने बच्चों को हाकी सिखाना शुरू किया और इसके लिए जी-तोड़ मेहनत की।

गांव में स्थित अपनी जमीन पर पिता के नाम से मेंघबरन सिंह हाकी स्टेडियम की नींव रखी। कुछ ही दिन बाद आसपास के अलावा गैर जनपद से भी खिलाड़ी यहां आकर हाकी के गुर सीखने लगे। तेजबहादुर सिंह का सपना था कि स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ लगे और इस सपने को पंख लगा जब उनके अनुज राधेमोहन सिंह जिले के सांसद बने। वर्ष 2007 में राधेमोहन सिंह सांसद बने तो स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ लगाने का पूरा प्रयास किया।एस्ट्रोटर्फ लगा और उसका उद्धाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया।

हाकी सिखाने के लिए कोच इंद्रदेव राजभर को तैनात कर दिया। करमपुर स्टेडियम के खिलाड़ी के रूप में ललित उपाध्याय ने सबसे पहले टीम इंडिया में कदम रखा। इसके बाद अजीत पांडेय और राजकुमार पाल भी टीम इंडिया में पहुंच गए। इन तीनों खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर तेजबहादुर सिंह के सपने को पूरा किया। ललित उपाध्याय के शानदार खेल को देख उनका चयन ओलंपिक में हुआ और उन्होंने पदक भी प्राप्त किया।

स्टेडियम के उत्तम सिंह व राहुल राजभर इस समय जूनियर इंडिया टीम में खेल रहे हैं। उत्तम व राहुल ने जूनियर विश्वकप में शानदार प्रदर्शन भी किया। 30 अप्रैल 2021 को तेज बहादुर सिंह ने अंतिम सांस ली तो खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

करमपुर के मेघबरन स्टेडियम के संस्थापक ठाकुर तेजबहादुर सिंह की प्रथम पुण्यतिथि पर करमपुर में उनके प्रशंसकों, खेल प्रेमियों ने शनिवार को उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर उनके शिष्य और ओलंपियन ललित कुमार उपाध्याय ने उनको याद करते हुए उन्हें विलक्षण व्यक्ति बताया और कहा कि उन्होंने हॉकी में सैकड़ों सफल खिलाड़ी दिए। वह भी उन्हीं में से एक हैं। उनका नाम हमेशा अमर रहेगा।

इस वक्त तेज बहादुर सिंह के सपनों को उनके भतीजे अनिकेत सिंह आगे बढ़ा रहे हैं. उनकी याद में अनिकेत ने एक खुबसूरत कविता की रचना भी की.

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