नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हाई कोर्ट्स के चीफ जस्टिस और मुख्यमंत्रियों के संयुक्त सम्मेलन (Joint Conference of Chief Ministers and Chief Justices of High Courts) में देश के मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना (CJI NV Ramana) ने कहा कि अदालतों के फैसलों के बावजूद सरकारों द्वारा जानबूझकर उनका पालन नहीं करना लोकतंत्र की सेहत के लिए अच्छा नहीं है।  

कहीं आप बोर तो नहीं हो गये. क्योंकि मैं जब ऐसी कोई खबर दिखता हूँ तो आपका प्यार ज्यादा नहीं मिलता खैर चलिए आपके रूचि वाली खबर बताता हूँ, ये भी खबर महत्वपूर्ण हैं.

अयोध्या में दंगा करवाने के लिए जो प्लानिंग की गई वो भी लोकतंत्र की सेहत के लिए सबसे खतरनाक है. ख़बरों के अनुसार अयोध्या में अराजक तत्वों की ओर से एक संप्रदाय के धर्म ग्रंथ पर अभद्र टिप्पणी लिखी बातों के कागज शहर की दो मस्जिदों समेत तीन स्थानों पर फेंके गए थे. मांस के टुकड़े फेंके गये थे. आरोपियों ने इस घटना को अंजाम देने के लिए सर पर जालीदार टोपी भी लगे थी. ये सारी घटना CCTV में कैद हो गई. बुधवार की सुबह इसकी जानकारी होते ही अयोध्या पुलिस और प्रशासन के अधिकारी तेजी से हरकत में आए और किसी अनहोनी की आशंका को समय रहते टाल दिया.

अयोध्या पुलिस ने बताया कि मामले में अभी तक 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस ने कहा कि आरोपियों पर NSA के तहत कार्रवाई की जाएगी.

ख़बरों के अनुसार अयोध्या में धार्मिक भावनाएं भड़का दंगा कराने की साजिश में शामिल आरोपियों में सबसे बड़ा किरदार महेश कुमार मिश्रा का है. महेश कुमार मिश्रा ही इस साजिश का मास्टरमाइंड है. महेश मिश्रा पर साजिश को अंजाम देने के लिए भड़का कर लोगों को इकट्ठा करने के आरोप हैं. महेश कुमार मिश्रा बीते कुछ सालों से ‘हिंदू योद्धा’ नाम का अपना संगठन चलाता है. महेश अयोध्या के ही कुछ नौजवान लड़कों को इकट्ठा कर कट्टर हिंदुत्व की विचारधारा को आगे बढ़ा रहा है. फेसबुक पर अपने विचारों को कट्टरता से रखने वाला महेश कुमार मिश्रा लंबे समय से आरएसएस से भी जुड़ा रहा है. महेश मिश्रा के भाई विशाल मिश्रा की मानें, तो वह आरएसएस का पूर्णकालिक सदस्य है. इसके अलावा बजरंग दल में जिला संयोजक के पद पर रहा है. साथ ही, वीएचपी में प्रांत सुरक्षा प्रमुख का पदाधिकारी भी रहा. दिल्ली और खरगोन में हुई हिंसा के बाद महेश मिश्रा के अंदर कट्टरता बढ़ने लगी थी.

एक खबर के अनुसार मई 2016 में बजरंग दल के स्पेशल ट्रेनिंग कैंप में अयोध्या के कारसेवक पुरम में हथियारों बंदूकों के साथ ट्रेनिंग का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें मुस्लिम धर्म और मुस्लिम लोगों को मारने काटने जैसे शब्दों का प्रयोग हुआ था. इस वीडियो में महेश मिश्रा नजर आया था. वीडियो वायरल होते ही प्रदेश और देश की सियासत में गर्मा गई. उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी. उस वक़्त पुलिस ने धार्मिक भावनाएं भड़काने और सामाजिक घृणा फैलाने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर महेश मिश्रा को गिरफ्तार किया था.

27 अप्रैल को BHU के महिला महाविद्यालय में इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था। कुलपति प्रो. सुधीर जैन इसमें शामिल हुए थे। छात्रों का कहना है कि बीएचयू में इससे पहले कभी इफ्तार पार्टी आयोजित नहीं की गई थी। इस विवाद के अगले ही दिन विवि में जगह-जगह कुछ भड़काऊ स्‍लोगन भी लिखे मिले थे। छात्र ऐसे स्‍लोगन लिखने वालों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग कर रहे हैं।  जिसके बाद ABVP से जुड़े छात्रों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. अब ख़बर आई है कि उन छात्रों ने इफ्तार पार्टी के विरोध में कुलपति आवास के बाहर गंगाजल छिड़ककर शुद्धीकरण की बात कही. साथ ही साथ अपना सिर भी मुंडवाया.

गौरतलब है कि बीएचयू के अधिकारिक ट्विटर हैंडल से बुधवार को परिसर में हुए इफ्तार आयोजन के बारे में बताया गया था.

ट्वीट में कहा गया था, ‘रमज़ान के पाक महीने में आज काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित महिला महाविद्यालय में रोज़ा इफ्तार का आयोजन किया गया, जिसमें कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन भी शामिल हुए. कुलपति जी के साथ महिला महाविद्यालय के रोज़ादार शिक्षक, शिक्षिकाओं व छात्राओं ने अपना रोज़ा खोला व इफ्तार की.’

ख़बरों के अनुसार वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक बयान में कहा है कि परिसर में इफ्तार का आयोजन कई वर्षों से हो रहा है और मौजूद होने पर विश्वविद्यालय के कुलपति हमेशा उसमें भाग लेते हैं. गुरुवार देर शाम इस संबंध में जारी आधिकारिक बयान में विश्वविद्यालय प्रशासन ने हंगामे को निंदनीय बताया और कहा, ‘पंडित मदन मोहन मालवीय के मूल्यों व आदर्शों के अनुरूप स्थापित इस विश्वविद्यालय में किसी भी आधार पर, किसी के साथ भी भेदभाव का कोई स्थान नहीं है.’ बयान में कहा गया है, ‘महिला महाविद्यालय में रोज़ा इफ्तार का आयोजन किया गया, जिसमें कुलपति को आमंत्रित किया गया था. पिछले दो वर्षों से कोरोना महामारी की वजह से इसका आयोजन नहीं हो सका था. इस साल आयोजन में कुलपति समेत विभिन्न लोगों ने हिस्सा लिया.’

वहीं, विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा चलाए जाने वाले एक फेसबुक पेज ‘बीएचयू बज़’ पर इसके बाद पिछले कुछ सालों के इफ्तार आयोजन की तस्वीरें भी साझा की गईं.

सवाल ये नहीं होना चाहिए की ये कार्यक्रम आयोजित क्यों हुआ? जबकि होना ये चाहिए कि हर धर्म के बड़े त्योहारों के मौके पर आयोजित कार्यक्रमों में हर समुदाय से लोगों को बुलाना चाहिए, ताकि सभी एक दुसरे की संस्कृति और सभ्यता को समझ सके और सम्मान करें.

(मीडिया प्लेटफार्म पर प्रकाशित खबरों पर आधारित)

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