“विगत पांच वर्षों में हमने अनेक चुनौतियों का सामना किया है. हमें एक बीमारू प्रदेश मिला था, स्थिति बिगड़ी हुई थी, अराजकता थी, दंगों की संस्कृति थी. ऐसे में टीम यूपी ने लगातार प्रयास कर एक नई कार्यसंस्कृति तैयार की और हमने साबित किया कि उत्तर प्रदेश दंगामुक्त हो सकता है.”

ये बातें हम नहीं कह रहे हैं, ये बात उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के भवन, ममता राजकीय मानसिक मंदित विद्यालय, चंदौली व संकेत जूनियर हाईस्कूल, चित्रकूट का शिलान्यास करने के साथ ही वि.वि. के विद्यार्थियों को टैबलेट वितरण करने के उपरांत कहीं.

सबसे बड़ा सवाल ये हैं कि उत्तर प्रदेश दंगा मुक्त कैसे हुआ? बुलडोजर से या लाउडस्पीकर से? सबसे बड़ा सवाल है कि टीम यूपी की नै कार्यसंस्कृति कैसे तैयार हुई? बुलडोजर से या लाउडस्पीकर से?

उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बुधवार को बताया, “पूरे प्रदेश में धार्मिक स्थलों पर अवैध रूप से लगाए गए लाउडस्पीकर उतारने और वैध लाउडस्पीकर की आवाज कम करने के सिलसिले में एक अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत बुधवार दोपहर तक 10923 लाउडस्पीकर हटाए गए हैं और 35221 ध्वनि विस्तारक यंत्रों की आवाज अनुमन्य सीमा तक कम की गई है.’

खैर मध्य प्रदेश और दिल्ली में जो बुलडोजर चला वो कहा चला और कैसे चला? इसपर तमाम रिपोर्ट्स आ रही हैं और आँसू भी दिख रख रहे हैं. यह बुलडोज़र नहीं है बल्कि उस खेल का प्रतीक है जिसे मिलकर ताकतवर लोग धर्म और कानून के नाम पर खेल रहे हैं. ग़ौर से देखेंगे तो यह बुलडोज़र न्याय और अन्याय के बीच की रेखा पर चलता दिखाई देगा.

कुछ तथाकथित मीडिया कितनी चतुराई से उन लोगों को लेक्चर दे रहा है जो बुलडोज़र पर सवाल उठा रहे हैं, उनसे कहता है कि कानून पर भरोसा करना होगा, सब कानून से चलेगा. कुछ तथाकथित मीडिया जानता है कि कानून कैसे चलता है. उसे यह भी पता है कि यह कानून किसके हिसाब से और किसके ख़िलाफ़ चलता है. इसलिए जिनके घर टूटे हैं उन्हें वापस उसी कानून को लागू करने वालों के पास भेज रहा है जो कुर्सी पर बैठ कर किसी और का एजेंडा लागू कर रहे होते हैं.

लेकिन एक सवाल और है कि बुलडोजर को यूपी के विधानसभा चुनाव में ब्रांड बनाया गया, लेकिन यूपी में बुलडोजर कहाँ चला? ज्यादातर जो खबरे आई हैं उनके अनुसार जहाँ जहाँ बुलडोजर चला उस संपत्ति का सम्बन्ध उनसे था जिनका नाम कानून की किताब में माफिया के रूप में दर्ज है. इस पर सवाल हो सकते हैं और यह एक अलग चर्चा का विषय हो सकता है लेकिन जहाँ जहाँ बुलडोजर चला वहां लोगों की दुकाने थी अब उनका रोजगार चौपट हो चूका है. अब वो दूकानदार करे भी तो क्या करें? जहां अच्छा मार्किट है तो वहां दुकाने, काम्प्लेक्स इत्यादि ताकतवर लोगों की हैं और उनमे से कुछ ताकतवरों का नाम बाद में कानून की किताब में माफिया के रूप में दर्ज हो जाता है और बुलडोजर चल जाता है, रोजगार मर जाता है. सरकार को थोड़ा विचार करना होगा.

खैर उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर में बुलडोजर कमाल करने वाला है. एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार गाजीपुर में कचहरी के पास बना जिला पंचायत भवन अब ध्वस्त किया जायेगा, जाहिर सी बात है ध्वस्तीकरण तो बुलडोजर से ही होगा. जी हाँ अब यहाँ 15 करोड़ रूपये से नई ईमारत बनेगी. यह ईमारत पांच मंजिला होगी. इसमें निचे 60 दुकाने होंगी, पार्किंग की व्यवस्था होगी. यह भवन नए गाजीपुर की नई पहचान भी बन सकता है.

वर्ष 1916 में ब्रिटिश शासन काल में कचहरी के पास के डिस्ट्रिक्ट बोर्ड बना था, यहीं से सारा विकास कार्य किया जाता था, बाद में इसे ही जिला पंचायत भवन बना दिया गया. इस भवन का कई बार रंग रोगन तो हुआ लेकिन इस भवन की आयु 100 वर्ष से ज्यादा हो चुकी है. अब शासन के आदेश पर इसे ध्वस्त कर नया भवन बनाया जायेगा.

ख़बरों के अनुसार अपर मुख्य अधिकारी सुजीत मिश्र ने बताया कि नया जिला पंचायत भवन का स्टीमेट तैयार कर लिया गया है, 30 अप्रैल को सदन की बैठक में इसे पेश किया जायेगा. इसके बाद प्रस्ताव बनाकर शासन को प्रेषित किया जायेगा.

ख़बर के अनुसार नया जिला पंचायत भवन का खाका लगभग तैयार कर लिया गया है. इसमें कुल 60 दुकाने होंगी, उपरी ताल पर ही जिला पंचायत सभागार, अध्यक्ष का कक्ष व सभी अधिकारीयों का कार्यालय होगा. दुकानों के सञ्चालन में कोई परेशानी न हो इसके लिए ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी.

वहीं इसके आलावा गाजीपुर की पूरी तस्वीर भी बदलने वाली है. गाजीपुर के नया मानचित्र जरी किया गया है, इसका नाम है गाजीपुर महायोजना 2031. आमजनों की आवयश्कता को दृष्टिगत रखते हुए इस महायोजना में आवासीय, व्यावसायिक, उद्योगिक क्षेत्र, सामुदायिक/सांस्कृतिक सुविधाएं एवं उपयोगिता, पार्क व खुले स्थल, यातायात और परिवहन, हाईवे फैसिलिटी जोन का प्रबंधन किया गया है. इसको नियंत्रण प्राधिकारी द्वारा स्वीकृति दे दी गई है और आमजनों की आपत्ति और सुझाव को 24 मई 2022 तक माँगा गया है.

अब इसको ऐसे समझिये, जो नक्सा जारी किया गया है उसको आप मोटी भाषा में कह सकतें हैं कि गाजीपुर का विकास किया जायेगा, जनसँख्या के हिसाब से सुविधाएं बढेंगी. लेकिन इसमें जो निर्माण अवैध होगा, उसके लिए कई सवाल हैं. की वो अवैध कैसे हैं और कैसे उसका समाधान होगा? अब जहाँ नए पार्क बनेगें और वहाँ पहले से कोई निर्माण होगा तो क्या उसे हटाना भी पड़ सकता है? यातायात और परिवहन के लिए सड़कों का चौडीकरण होगा क्या? यदि होगा तो क्या पहले से बने निर्माण को भी हटाना पड़ेगा? नियमानुसार गंगा किनारे से 200 मीटर के दायरे में निर्माण नहीं हो सकता तो गाजीपुर शहर के आधी आबादी का क्या होगा? उसके लिए क्या नियम है? गाजीपुर कैसे स्मार्ट गाजीपुर या चर्चाओं वाली भाषा में स्मार्ट गाधिपुर बनेगा?

इन सब सवालों के जबाब की तलाश में हम भी हैं…

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