पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी और उनके भाई सांसद अफजाल अंसारी समेत पूरे परिवार, रिश्तेदार और करीबियों पर ईडी शिकंजा कसने की तैयारी में है। एक दैनिक समाचार पत्र के अनुसार राजधानी में उनकी संपत्तियां खंगाली जा रही हैं, इसके लिए एलडीए उपाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी ने कई कमेटियां बनाई हैं।

प्राधिकरण सचिव पवन गंगवार की अध्यक्षता वाली चार वरिष्ठ अफसरों की कमेटी इसकी अगुवाई करेगी। नगर निगम और आवास विकास में भी इनकी संपत्तियों की तलाश शुरू हो गई है। साथ ही मुख्तार अंसारी के नाम पर शहर में अवैध कब्जा और इमारतें खड़ी कर चुके ठेकेदार और बिल्डर भी रडार पर हैं। इनकी अवैध संपत्तियों की जांच कर प्राधिकरण कार्रवाई करेगा।

ख़बरों के अनुसार ईडी के डिप्टी डायरेक्टर मनीष यादव ने मुख्तार अंसारी और उनके रिश्तेदारों की सम्पत्तियों की तलाश के लिए एलडीए उपाध्यक्ष को पत्र लिखा है। इसमें सम्पत्तियों का विवरण मांगा है। जिनके मामले अदालत में लंबित हैं, उनकी जानकारी भी मांगी गई है। प्राधिकरण उपाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी ने इसके लिए बीती 18 अप्रैल को एक आईएएस, दो पीसीएस अफसरों समेत कुल चार अफसरों की समिति बनाई है। सचिव पवन गंगवार इसके अध्यक्ष हैं।

इन सदस्यों की संपत्ति पूछी 
ख़बरों के अनुसार मुख्तार अन्सारी, भाई अफजाल अन्सारी, मुख्तार अंसारी की पत्नी अफसाना, बेटे अब्बास, उमर के अलावा अतीफ रजा पुत्र जमशेद रजा और उनके सहयोगियों, करीबियों का ब्योरा ईडी ने मांगा है।

वर्तमान में बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी, मौ सदर के पूर्व विधायक हैं। उन पर पिछले साल जुलाई में मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया गया था। जिसके बाद नवंबर में ईडी की टीम ने बांदा जेल में जाकर उनसे पूछताछ करते हुए बयान भी दर्ज किया था। मऊ व लखनऊ जनपद में पूर्व में दर्ज तीन मुकदमों को आधार बनाते हुए ईडी ने उनके खिलाफ मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया था। आपराधिक मुकदमों के साथ ही जमीनों की हेराफेरी, अवैध कब्जे व गबन आदि के आरोप से संबंधित मामले भी उन पर दर्ज हैं।

अधिवक्ता का आरोप- अदालत का आदेश नहीं मान रहा बांदा जेल प्रशासन, हत्या का है डर

मुख्तार अंसारी से मिलने के बाद मंगलवार को जेल के बाहर लखनऊ से आए अधिवक्ता लियाकत अली ने पत्रकारों से कहा कि मुख्तार अंसारी के मामले में बांदा जेल में न्यायालय के किसी आदेश का पालन नहीं हो रहा। जेल अधिकारियों ने सिर्फ इतना लिखा है कि वह शासन की अनुमति से हाईकोर्ट जाएंगे। लेकिन अभी तक नहीं गए न ही कोई स्टे है।

ऐसे में न्यायालय के आदेश का पालन होना चाहिए। मुख्तार के हवाले से अधिवक्ता ने कहा कि जेल के अंदर हत्या की साजिश रची जा रही है। जेल में कोई भी घटना घट सकती है। पेशी में जाते वक्त भी खतरा है। इस सवाल पर कि किससे खतरा है? अधिवक्ता ने कहा कि वर्ष 2001 में गाजीपुर में मुख्तार अंसारी की कार पर एके-47 से हमला हुआ था। नौ लोग गोली लगने से घायल हुए थे। इसकी रिपोर्ट मुख्तार अंसारी ने बृजेश सिंह व त्रिभुवन सिंह आदि पर दर्ज कराई थी। यही सब मुख्तार के जानी दुश्मन हैं।

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