India is my country and all Indians are my brothers
and sisters. I love my country and I am proud of its
rich and varied heritage. I shall always strive to be
worthy of it. I shall give respect to my parents,
teachers and elders and treat everyone with
courtesy. To my country and my people, I pledge
my devotion. In their well being and prosperity
alone, lies my happiness.

आप चाहे हिंदी मीडियम के छात्र हों या अंग्रेजी मीडियम के, बचपन में स्कूल में समानता और संस्कृति को किसी न किसी रूप में तो सिखाया ही जाता था. फिर लोग इस शिक्षा को भूल कैसे जाते हैं, खैर हो सकता है वो स्कूल से भाग जाते होंगे और जब गुरु जी सवाल पूछते होंगे तो यही लोग मुंह में गुटका दबाये गुरु जी को ही कूट देते होंगे. किस्से तो आपने सुने ही होंगे ऐसे…

खैर चलिए नफरत को इंजॉय करने वाले भगवान को तो मानते ही होंगें, श्रीराम चन्द्र जी को, श्रीकृष्ण को. दुसरे पक्ष वाले अल्लाह को, खुदा को…

आजकल तो धर्म के काल्पनिक विद्यालय या काल्पनिक मदरसे में भगवान या अल्लाह की रक्षा करने के लिए नफरत का मन मोह लेने वाला पाठ पढाया ही जाता होगा. तभी तो जिसने सोम मंगल शनिचर को एक अगरबत्ती न जलाया हो वो भी धर्म की शिक्षा देता है, जिसने पांच वक़्त का नमाज न पढ़ा हो वो भी धर्म की शिक्षा देता है.

पवित्र ग्रन्थ गीता के छठे अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं सुहृन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु ।
साधुष्वपि च पापेषु समबुद्धिर्विशिष्यते ॥

यानि सुहृद् (स्वार्थ रहित सबका हित करने वाला), मित्र, वैरी, उदासीन (पक्षपातरहित), मध्यस्थ (दोनों ओर की भलाई चाहने वाला), द्वेष्य और बन्धुगणों में, धर्मात्माओं में और पापियों में भी समान भाव रखने वाला अत्यन्त श्रेष्ठ है॥

प्रभु श्रीराम ने शबरी के जूठे बेर खाकर, ऊँच नीच की भावना रखने वालों को बड़ा सन्देश दिया था.

तो क्या हाथ में तलवार लहरा कर जय श्रीराम का नारा लगाने वाले, प्रभु श्रीराम के बताये रास्ते पर चलते हैं या भगवान श्रीकृष्ण का पालन करते हैं.

18 से 30 वर्ष के युवा दुर्गा पूजा के मेले में क्या क्या करते हैं और रामनवमी के शोभा यात्रा में क्या करते हैं ये सब भगवान देख भी रहे हैं और लिख भी रहे हैं.

आज कल Whats App University के होनहार छात्र अल्लाह और भगवान की परिभाषा समझाने का कार्य कर रहे हैं. मित्रों अपने ज्ञान चक्षु बंद रखो, खोलने से भी तुम्हें ज्ञान प्राप्त नहीं होने वाला. लेकिन एक ज्ञान लेते जाओ. भगवान शब्द हिंदी भाषा है और जब आप इसे उर्दू या अरबी में अनुवाद करते हैं तो इसका अर्थ होता है अल्लाह या खुदा. अब इस ज्ञान को लेने के लिए Whats App University के होनहार छात्रों को अपना CPU रूपी दिमाग फॉर्मेट करना पड़ेगा.

एक तरफ जहाँ कई सारे बेरोजगार युवा रोजगार की जगह नफरत की कंपनी में बिना पगार के काम कर रहे हैं और कई सारे छात्र जॉब ओरिएंटेड कोर्सेज की जगह नफरत ओरिएंटेड कोर्सेज का ट्यूशन ले रहे हैं तो वहीँ कुछ युवा ऐसे हैं जिन्होंने अस्पताल की बेहाल स्थिति पर बड़ा कदम उठाया है.

उत्तर प्रदेश के जनपद गाज़ीपुर के जिला अस्पताल की लचर व्यवस्था व विभिन्न मांगों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता व पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय और उनके सहयोगियों दीपक कुमार, जितेंद्र विश्वकर्मा, अनिल कुमार, अन्नू जैसल, अभिषेक सिंघानिया, अजय यादव, सुनिल, धर्मेंद्र, दीपक, संतोष,शनि, शैलेश आदि ने 16 सूत्रीय मांग पत्र महर्षि विश्वामित्र मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डा. आनंद मिश्र को सौंपा है।

ये युवा चाहते हैं की सरकारी धन का सदुपयोग हो, सरकार लगातार आमजनमानस ले अच्छी व्यवस्थाएं लाना चाहतीं है लेकिन हकीकत ये है कि जनता सरकार के मंशा के अनुरूप सुविधाएं नहीं मिलती हैं. बड़े स्तर पर राजस्व को लुटा जाता है या बर्बाद किया जाता है. अब इस अस्पताल में हर जाति और धर्म के मरीज अपना इलाज कराने जाते हैं. .

छात्रों ने विभिन मांगें की :

1- अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, सीटी स्कैन व पैथोलॉजी की जाँच में हो रही लापरवाही पर रोक लगाकर जाँच के तरीकों में सुधार कर 24 घंटे जाँच की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

2- कमीशन के चक्कर में मुफ्त दवाओं के बजाय प्राइवेट मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध दवाओं की पर्ची बनाने वाले डॉक्टरों पर कठोरतम कार्रवाई की जाए ताकि पैसे के आभाव में मरीजों को असुविधा का सामना न करना पड़े। 

3- जिला अस्पताल के औषधि भंडार में अनुपलब्ध बेहतर प्रभावकारी दवा व इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

4- जले हुए मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में बर्नवार्ड की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए।

5- जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में सभी ग्रुप का ब्लड उपलब्ध कराया जाए।

6- पैरालाइज व शारीरिक कमजोरी के कारण चलने में अक्षम मरीजों के लिए जिला अस्पताल में पर्याप्त संख्या में व्हील चेयर की व्यवस्था कराई जाए।

7- पूरे अस्पताल में शौचालयों की बेहद खराब स्थिति है जिससे मरीजों और उनके साथ आए परिजनों को बहुत समस्याएँ हो रही हैं। अतः अस्पताल में मौजूद सभी शौचालयों की व्यवस्था दुरुस्त कराई जाए तथा निरंतर निगरानी करके शौचालयों के साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

8- पूरे अस्पताल की खिड़कियां व बेड टूटे-फूटे हैं अतः खिड़कियों व बेड को तत्काल ठीक किया जाए।

9-  सभी पेयजल संयंत्र खराब हैं, जिससे मरीजों को दुकानों से पानी खरीदना पड़ रहा है अतः जिला अस्पताल के सभी पेयजल संयंत्रों को तत्काल ठीक किया जाए और प्रत्येक तल पर पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए।

10- पर्याप्त सरकारी एम्बुलेंस उपलब्ध करा कर जिला अस्पताल में प्राइवेट एम्बुलेंसों का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए।

11- कोरोना काल के बाद से ही जिला अस्पताल में बना लिफ्ट बंद है, अब मरीजों की आवाजाही बढ़ चुकी है इसलिए लिफ्ट को तत्काल चालू कराया जाए।

12- कमीशन के आधार पर मरीजों को दलालों द्वारा दवा उपलब्ध कराई जाती है तथा सभी प्रकार की जाँच में वरीयता दिलायी जाती है अतः इस अपराध को रोकने के लिए जिला अस्पताल में दलालों का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए तथा नियमित रूप से निगरानी करके दलालों को पकड़ा जाए और उन पर कठोरतम कार्रवाई की जाए।

13- जिला अस्पताल में वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। 

14- जच्चा-बच्चा, पथरी व एक्सीडेंटल मरीजों की तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए।

15- जिला अस्पताल के वार्डों में बाल रोग विशेषज्ञ की ड्यूटी राउंड ओ क्लाक लगाई जाए।

16- जिला अस्पताल के वार्डो में बालरोग विशेषज्ञ की राउंड ओ क्लाक ड्यूटी सुनिश्चित कराई जाए।

वहीँ दूसरी तरफ गाजीपुर शहर के मध्य में महिला अस्पताल स्थित है, शहर के मध्य में अस्पताल होने की वजह से जनता को काफी सहूलियत मिलती है, इमरजेंसी के केस में मरीज को आसानी से पहुँचाया जा सकता है ऐसे में जनता का कहना है कि इस अस्पताल में सुविधाओं की कमी है, उस कमी को दूर किया जाये.

दीपक उपाध्याय और उनके साथियों ने गाजीपुर में एक विश्वविद्यालय के स्थापना की भी मांग की है . अब आप तय कीजिये की आपके समाज का युवा कैसा होना चाहिए, हाथ में तलवार नचाने वाला या शिक्षा, स्वास्थ और रोजगार के लिए आवाज उठाने वाला. कुदरत ने कोराना काल के रूप में हमें इंशानियत बड़ा सन्देश दिया था. नफ़रत से मूलभूत मुद्दों से भटकाया जा सकता है, समाधान नहीं आ सकता. मजहबी नफ़रत से दंगे हो जाते हैं और इन दंगों दोनों पक्षों के लोग अपने परिवार तक को खो देते हैं जिन्हें वो सबसे ज्यादा प्यार करते हैं. इस नफ़रत का अंत आप अपने परिवार में कर सकते हैं.

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