ऐसा कोई हफ्ता या दिन नहीं गुज़रता है, जब देश के किसी हिस्से से ऐसी ख़बरें नहीं आतीं कि एक दल किसी को खाने से रोक रहा है,एक दल किसी को मंदिर के बाहर तरबूज बेचने से रोक रहा है, अधिकारों की लड़ाई संविधान की अदालतों में नहीं, धर्म के चौराहों पर हो रही है. अधिकार का फैसला धर्म के आधार पर हो रहा है. संविधान की पंचायत में सुनवाई ऐसे होती है जैसे आज से पहले यह विषय नहीं आया हो इसलिए पंच समझने के नाम पर तारीखों का सहारा ले रहे हैं.हर दिन बहस का उत्पादन किया जा रहा है.इन घटनाओं की संख्या को अगर आप भारत के मानचित्र पर रखकर देखेंगे तो पता चलेगाा कि आप नज़रअंदाज़ कर दें या निंदा कर दें, दोनों ही बातों से कोई असर नहीं पड़ता है. इन धार्मिक अतिक्रमणों और आक्रमणों के सहारे समाज के मिडिल क्लास को एक किस्म के धार्मिक और मानसिक सुख की सप्लाई होती है. उसे इस खुजली से आनंद मिल रहा है. हर जगह नया भारत और सबका भारत बनाने के नारे तो लिखे हुए हैं लेकिन इन्हीं नारों की आंखों के सामने संघर्षशील भारत बनता दिखाई दे रहा है. 

संघर्ष अपने स्वाभिमान जिन्दा रखने का, संघर्ष अपने सम्मान को जिन्दा रखने का. इस बिच घट रही घटनाओं और आरोपों से एक बात स्पष्ट तो होती हुई नज़र आ रही है कि धर्म एक ऐसा विषय बन गया है जहाँ धर्म के नाम पर राजनितिक बदला लेना भी आसान सा प्रतीत होता है.

आज डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती है. वह अपने काबलियत और मेहनत के बल पर संविधान सभा के अध्यक्ष बने और आजादी के बाद भारत के संविधान के निर्माण में अभूतपूर्व योगदान दिया। बाबा साहेब ने कहा था कि “मैं ऐसे धर्म को मानता हूं जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है।”

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ, लेकिन सीटें 2017 के चुनाव से कम आई. कम इसलिए आयीं क्योंकि समाजवादी पार्टी की सीटें 2017 के मुकाबले ज्यादा आयीं. कुछ जनपद ऐसे हैं जहाँ भाजपा का खता भी नहीं खुला. उन्ही जनपदों में से एक है गाजीपुर. गाजीपुर में एमएलसी चुनाव के दौरान ख़बरों का बाज़ार गर्म रहा. इस बिच कुछ घटनाएं घटी. इन घटनाओं की खबरें भी आयीं और आरोप भी लगे लेकिन इन घटनाओं की स्टोरी का मोरल ऑफ़ द स्टोरी समझने के लिए आपको अपने समझ और शिक्षा का प्रयोग करना पड़ेगा.

यूपी के गाजीपुर जिले में  कुछ लोगों ने सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का प्रयास किया है। मामला गत 2 अप्रैल का है, कुछ लोगों ने गहमर गांव में कलश यात्रा के दौरान मस्जिद में घुसकर नारे लगाए और झंडा फहराया। इसका वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर एक युवक को गिरफ्तार कर लिया था। ख़बरों के अनुसार मस्जिद प्रबंधन ने मामले में शिकायत नहीं किया था और न ही झंडा फहराने को लेकर दुसरे पक्ष ने सड़क पर कोई विरोध या बवाल किया. हाँ इस मामले में समाजवादी पार्टी के विधायकों ओमप्रकाश सिंह और सुहैब अंसारी ने कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दिय था। अब इस स्टोरी का मोरल ऑफ़ द स्टोरी समझने के लिए आपको अपने समझ और शिक्षा, दोनों का प्रयोग करना पड़ेगा.

बाबा साहेब ने कहा था कि “जो व्यक्ति अपनी मौत को हमेशा याद रखता है, वह सदा अच्छे कार्य में लगा रहता है।” उन्होंने कहा था कि “जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते, कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है वो आपके लिए बेईमानी है।”

5 अप्रैल को सपा विधायकों ने गाजीपुर शहर स्थित समता भवन पर एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया, उस प्रेस वार्ता में गहमर के अलावा मोहम्दाबाद के एक घटना पर भी न्याय की मांग की गई. वो घटना मोहम्दाबाद के मलिकपुरा गाँव की थी. आरोप था की मलिकपुरा के प्रधानपति को पुलिस कोतवाली लेकर आई, रात में उनके घर चाहरदीवारी फंड कर घुसी, उनके पत्नी यानि वर्तमान ग्राम प्रधान को अपमानित किया गया, उनके मासूम बच्चों को डराया गया, यहाँ तक करीब साल का बेटा सो रहा था तो उसे लाठी के प्रहार से उठाया गया. ये आरोप लगाते हुए मलिकपुरा की ग्राम प्रधान रोने लगी. खैर ये सभी आरोप लगाये गये.

6 अप्रैल 2022 को एक दैनिक अख़बार में खबर प्रकाशित हुई कि मोहम्दाबाद के सलेमपुर मोड़ के पास ओमप्रकाश यादव नाम के व्यक्ति अपने साथियों के अपने मकान के पास ओम लिखा भगवा ध्वज और भगवान् श्रीराम का फोटो लगा रहे थे. आरोप है कि पूर्व ग्राम प्रधान शशिकांत शर्मा, रविकांत शर्मा, ओम प्रकाश शर्मा, डब्लू उर्फ़ रविकांत शर्मा, देवेन्द्र वर्मा, फैजी अहमद, धर्मेन्द्र कन्नौजिया अपने साथ अन्य 12-15 लोगों के साथ हाकी डंडा लेकर पहुंचें, झंडा और फोटो फाड़कर फेक दिए. मन करने पर मारपीट शुरू कर दी. इस दौरान धर्म विरोधी और देश विरोधी नारेबाजी कर दौडाते हुए हमारे घर में घुस गए और जान से मारने की धमकी देते हुए लौट गए. आगे लिखा है कि मारपीट, धमकी देने, एससी एसटी एक्ट व धार्मिक भावना को ठेस पहुचने का मामला दर्ज किया गया है, पुलिस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य की तलाश जारी है.

इस खबर में ये भी लिखा है कि गिरफ्तार पूर्व ग्राम प्रधान पहले भाजपा के कार्यकर्त्ता थे. विधानसभा चुनाव के पूर्व वह अंसारी बंधुओं के खेमे में जाकर सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली. गत विधानसभा चुनाव और एमएलसी चुनाव में सपा प्रत्यासी के पक्ष में काफी सक्रीय भूमिका निभा रहे थे. अब इस घटना पर हमने मोहम्दाबाद के विधायक शोएब अंसारी उर्फ़ मन्नू अंसारी से भी बात किया. उन्होंने कहा ये सब स्क्रिप्टेड है, शशिकांत शर्मा वर्तमान ग्रामप्रधान के पति हैं, उनके ऊपर एमएलसी चुनाव को लेकर दबाब बनाया गया.

आपको बता दें कि शशिकांत शर्मा को स्वक्षता अभियान में कई उपलब्धियां हासिल हैं उन्हें गाजीपुर के कई जिलाधिकारियों द्वारा स्वक्षता अभियान के लिए कई बार सम्मानित किया जा चूका है.

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