लखनऊ | राजनीती की भी अजीब विडम्बना है. सत्ता और सुख के बिना कुछ जनप्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व नहीं चलता. चुनाव लड़ा है तो जितना भी हैं और जब जीत गये तो सत्ता भी चाहिए और जैसे तैसे यदि सत्ता से जुड़ गये तो पद भी चाहिए. बहरहाल राजनीति के इस दुनिया में ये बातें अब आम सी हो चली है हैं और इन्हीं आम बातों के बिच अब शिवपाल यादव के भाजपा में आने की अटकलें भी तेज हो गई हैं.

जी हाँ, समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के रवैये से आहत सपा विधायक व प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के मुखिया शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हाथ थाम सकते हैं। शिवपाल, अखिलेश की उपेक्षा से नाराज चल रहे हैं।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की बुलाई गई सहयोगी दलों की बैठक में शामिल न होकर पिछले दिनों दिल्ली गए शिवपाल की भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की चर्चाओं के बीच वह बुधवार को लखनऊ लौटे। यहां उन्होंने देर शाम सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की। चर्चाओं का बाज़ार यही ख़त्म नहीं हुआ चर्चा यह भी है कि भाजपा उन्हें राज्यसभा भेज सकती है।

सबसे पहले बुधवार को दोपहर में लखनऊ लौटे शिवपाल यादव ने विधायक पद की शपथ ली। शिवपाल यादव यूपी के जसवंतनगर सीट से विधायक हैं। इसके बाद देर शाम मुख्यमंत्री आवास पांच कालिदास मार्ग पहुंचकर सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। दोनों के बीच 20 मिनट से अधिक देर तक बातचीत हुई। हालांकि, शिवपाल का खेमा इसे शिष्टाचार भेंट बता रहा है। 

वैसे शिवपाल खेमे के डा. अशोक बाजपेयी भी भाजपा में पहले से हैं। इसके अलावा शारदा प्रताप शुक्ला, शिव कुमार बेरिया सहित उनके कई करीबी नेता पहले ही भगवा खेमे में जा चुके हैं। शिवपाल के भाजपा में जाने की अटकलों को इसलिए भी हवा मिल रही है क्योंकि न तो उनकी ओर से और न ही उनकी पार्टी की ओर से इसका खंडन किया गया। शिवपाल ने विधायक पद की शपथ लेने के बाद बुधवार को मीडिया से बस इतना कहा कि ‘समय आने पर सब बताऊंगा इंतजार कीजिए।’

चर्भाचाएं ये भी हैं कि भाजपा शिवपाल को अखिलेश यादव के इस्तीफा देने से रिक्त हुई आजमगढ़ संसदीय सीट के उपचुनाव में भी उतार सकती है। अगर ऐसा होता है तो शिवपाल अपनी जसवंतनगर विधानसभा सीट से बेटे आदित्य यादव को उपचुनाव में भाजपा के टिकट से उतार सकते हैं।

खैर खबर के अनुसार इस मुलाकात के तुरंत बाद सीएम योगी ने संगठन के बड़े नेताओं को चर्चा के लिए बुलाया। बताया यह भी जा रहा है कि उन्हें भाजपा राज्यसभा भी भेज सकती है। 

बता दें कि सपा अध्यक्ष व नेता विरोधी दल अखिलेश यादव ने मंगलवार शाम गठबंधन में शामिल दलों की बैठक बुलाई तो नाराज चल रहे उनके चाचा शिवपाल यादव शामिल नहीं हुए। इससे पहले सपा के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में भी शिवपाल इसलिए शामिल नहीं हुए थे क्योंकि उन्हें पार्टी के तरफ से न्योता नहीं दिया गया था, इस बार भतीजे के बुलावे के बावजूद चाचा नहीं आए।

सूत्रों के मुताबिक शिवपाल सपा प्रमुख अखिलेश के रवैये से बेहद आहत हैं और अपमानित महसूस कर रहे हैं। उनके करीबियों का कहना है कि लगातार चुनाव में शिवपाल ने अखिलेश और सपा के समर्थन में हर कदम उठाया। यहां तक कि अपनी पार्टी को कुर्बान कर खुद भी ‘साइकिल’ चुनाव चिह्न से लड़े। अपनी पार्टी के नेताओं को टिकट दिलाने के लिए जो सूची अखिलेश को दी, उसमें से एक भी टिकट नहीं दिया गया। इन सब मामलों से भी शिवपाल नाराज चल रहे थे।

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