उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा ने अपने प्रचार के मुख्य केंद्र पर बुलडोज़र को रखा था, भाजपा जनता के बिच अपने कानून व्यवस्था को लेकर जमकर प्रचार किया लेकिन योगी सरकार 1.0 में जहाँ जहाँ बुलडोजर चला वहां भाजपा को सफलता नहीं मिली. बहरहाल योगी सरकार 2.0 ने अपने एंटी माफिया मुहीम और तेजी ला दिया है. कई जगहों से बुलडोजर चलने की खबर है तो वहीँ मुख्तार अंसारी एक बार फिर चर्चाओं में हैं.

ऐसे तो मऊ सदर के पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी बांदा जेल में बंद हैं लेकिन उनसे संबधित मामलों में मुश्किलें बढती जा रही हैं. एक तरफ एम्बुलेंस प्रकरण में डॉ अलका राय सहित उनके भाई को भाई को गिरफ्तार कर 30 दिन के न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है तो वहीँ मुख़्तार अंसारी के लखनऊ पेशी के दौरान कोई जेल में अफसरों के आने-जाने की हर गतिविधियों के बारे में जानकारी उनके पुत्र और मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी को दे रहा था। इसी को आधार बना पुलिस और प्रशासन ने उसकी तलाश शुरू कर दी है।

मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास को कौन दे रहा था जेल के अंदर से पल-पल की जानकारी?

ख़बर के अनुसार बांदा जेल के अंदर और बाहर कोई व्यक्ति मुख़्तार अंसारी के लखनऊ पेशी के दौरान सक्रिय था। वह जेल में अफसरों के आने-जाने की हर गतिविधियों के बारे में जानकारी मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी को दे रहा था। इन्हीं जानकारियों को विधायक अब्बास बिन मुख्तार अंसारी द्वारा ट्वीट किया जा रहा था। इसी को आधार बना पुलिस और प्रशासन ने उस व्यक्ति की तलाश शुरू कर दी है। पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी बांदा मंडल कारगार की तनहाई बैरक में सीसीटीवी की निगरानी में है।

एक समाचार पत्र के खबर के अनुसार एएसपी लक्ष्मी निवास मिश्रा ने बताया कि जेल परिसर के आसपास बीते रविवार रात 12 बजे के बाद सक्रिय मोबाइलों का डाटा फिल्ट्रेशन कराया जा रहा है। जिन नंबरों के जरिए प्राइवेसी का अलर्ट मुख्तार के बड़े बेटे तक पहुंचाया जा रहा था, उसकी जल्द ही जानकारी जुटा ली जाएगी। इस पर तेजी से काम चल रहा है।

मुख्तार अंसारी एंबुलेंस प्रकरण में डॉ. अलका राय और शेषनाथ गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में 31 मार्च 2021 को बाराबंकी की एंबुलेंस उस वक्त चर्चा में आई, जब पंजाब के रोपण जेल से मोहाली कोर्ट जाने में मुख्तार अंसारी ने एंबुलेंस का प्रयोग किया। जिसका पंजीकरण बाराबंकी परिवहन विभाग होना पाया गया। जांच के दौरान पुलिस द्वारा बताया गया कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे वर्ष 2013 में एम्बुलेंस बाराबंकी एआरटीओ कार्यालय से पंजीकृत कराई गई थी। बाराबंकी संभागीय परिवहन विभाग ने जब इस एंबुलेंस की पड़ताल शुरू की तो पता चला कि इसका रिनिवल ही नहीं कराया गया था और दस्तावेजों में डॉ. अल्का राय की फर्जी वोटर आईडी से पंजीकृत पाई गई।

मुख्तार अंसारी के पंजाब जेल में बंद होने के दौरान अन्य जिलों में पेशी पर जाने के लिए फर्जी नाम पते पर एंबुलेंस मुहैया कराने के आरोप पर मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने डॉ. अल्का राय, डॉ. शेषनाथ राय, राजनाथ यादव, मुजाहिद समेत कई के खिलाफ नगर कोतवाली में 02 अप्रैल 2021 को अपराध संख्या 369/21 पर धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120बी, 177, 506 आईपीसी और 07 क्रिमिनल लाॅ एमेंडमेंट एक्ट के तहत मुकदमा लिखाया गया था। मामले में 25 मार्च को गैंगस्टर के तहत दर्ज मुकदमें में मुख्तार अंसारी समेत 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है। डॉ. अल्का राय और उनके भाई शेषनाथ राय को मंगलावर को अरेस्ट किया गया, जबकि मुख्तार अंसारी बांदा जेल में और दो अन्य पहले से जेल में निरुद्ध है। मुकदमें में फरार 8 अन्य आरोपियों की तलाश पुलिस जुटी।

अब मुख्तार अंसारी से जुड़े एंबुलेंस (mukhtar ansari ambulance case) मामले में गैंगस्टर के आरोपी डॉ. अल्का राय और शेषनाथ राय (alka rai and sheshnath arrest) को बाराबंकी पुलिस ने गिरफ्तार कर कड़ी सुरक्षा के साथ गैंगस्टर कोर्ट में जज के समाने पेश किया। जहां कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 30 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा है। पूर्वांचल के पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी द्वारा फर्जी पते और दस्तावेजों पर तैयार कर एंबुलेंस इस्तेमाल किए जाने के मामले में बाराबंकी पुलिस ने कार्यवाही तेज कर मंगलवार को मऊ जिले में गैंगस्टर के आरोपी हॉस्पिटल संचालिका डॉ अल्का राय और इनके भाई शेषनाथ राय को कड़ी सुरक्षा के बीच गिरफ्तार किया। देवां पुलिस ने कार्यवाही करते हुए दोनों आरोपियों को गिफ्तार के बाराबंकी गैंगस्टर कोर्ट नंबर-8 में न्यायाधीश राजीव महेश्वरम के सामने पेश किया। जहां जज ने दोनों आरोपियों को 27 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

नगर क्षेत्राधिकारी आतिश सिंह ने बताया गैंगस्टर के मामले दर्ज मुकदमें में डॉ. अल्का राय और शेषनाथ राय को गिरफ्तारी की गई है। न्यायालय में पेश करने के बाद कोर्ट ने इन्हें 30 दिनों की रिमांड पर भेजा जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें दोबारा रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। फरार अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।

भड़काऊ बयान मामले में मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को राहत

विधानसभा चुनाव के दौरान अब्बास अंसारी ने मऊ जिले में चुनाव प्रचार के दौरान अफसरों को लेकर विवादित बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि यूपी में सरकार बदलने के बाद अफसरों को 6 महीने नहीं हटने दिया जाएगा. उनसे पहले हिसाब लिया जाएगा. इस बारे में अखिलेश यादव से बात भी हो चुकी है. अब्बास अंसारी के इस बयान पर खूब कोहराम मचा था. इस मामले में चुनाव आयोग ने अब्बास अंसारी पर 24 घंटे के चुनाव प्रचार की पाबंदी लगाई थी. बाद में पुलिस ने इस मामले में एफआइआर भी दर्ज की थी.

मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी को चुनाव के दौरान भड़काऊ बयानबाजी करने के मामले में राहत मिली है. इलाहाबाद कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अगले आदेश तक अब्बास की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने अब्बास की अर्जी पर सुनवाई करते हुए यूपी सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर उनसे 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है. 

अब्बास अंसारी की तरफ से उनके वकील उपेंद्र उपाध्याय ने कोर्ट में ये दलील दी कि विवादित बयानबाजी के मामले में चुनाव आयोग उन पर 24 घंटे की पाबंदी लगा चुका है. आयोग के आदेश का पालन करते हुए उन्होंने 24 घंटे तक चुनाव प्रचार नहीं किया था. ऐसे में उन्हें एक ही मामले में दो बार आरोपी नहीं बनाया जा सकता है. ये भड़काऊ भाषण का मामला हो सकता है, जिसमें चुनाव आयोग पहले ही कार्यवाही कर चुका है. ऐसे में एफआईआर दर्ज किया जाना पूरी तरह गलत है क्योंकि इसमें कतई कोई आपराधिक मामला नहीं बनता है.

अब्बास अंसारी ने इस मामले में एफआईआर रद्द किए जाने और गिरफ्तारी पर रोक लगाए जाने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी. अब्बास अंसारी की अर्जी पर उनके वकील उपेंद्र उपाध्याय ने दलील दी कि इस मामले में आदर्श आचार संहिता का मामला तो हो सकता है लेकिन इसमें कोई आपराधिक मामला नहीं बनता. अदालत उनकी इस दलील से सहमत नजर आई और उसने अब्बास अंसारी की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी. इस मामले पर अगली सुनवाई मई में होगी. 

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