गाजीपुर | कहते हैं कि धन और बल अच्छे अच्छों के सम्मान की बोली लगा देता है और केवल बोली ही नहीं लगती सम्मान बिक भी जाता है और गुलाम हो जाती जनता के स्वतंत्र होने की सोच. खैर लोगों में चर्चा है कि गाजीपुर में हो रहे एमएलसी चुनाव की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं. इस फिल्म में सत्ता की ताकत है, पैसा है, कूटनीति है, बहुबल है और न जाने क्या क्या है? अब लोगों ने इसे बॉलीवुड की फिल्म की तरह बता ही दिया है तो हमने भी सोचा उस कहानी को आपको सुना ही दूँ. नुक्कड़ वाले एक चाचा बता रहे थे कि इस कहानी में करीब तीन हज़ार से ज्यादा लोग हैं जिन्हें अपना राजा चुनना है और मजे की बात ये है कि राजा चुनने के बदले में उन्हें मोटी रकम मिलेगी, बस उन्हें अपना थोडा अपना सम्मान और स्वतंत्रता से समझौता करना पड़ेगा और करे भी क्यों न 6 साल में एक बार तो मौका मिलता है अपनी संस्कृति से गद्दारी करने का.

खैर चर्चा है कि इस कहानी की असली शुरुवात शुरू होती है उत्तम प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रचार से, गंधिपुरी नामक जनपद में विधानसभा के 7 प्रतिनिधि थे जिनमे 3 फुल छाप थे, 2 फुल को पियरके कुर्ते में लगा कर चल रहे थे और 2 साईकिल चला रहे थे, जब चुनाव आया तो पियरके कुर्ते वालों का भी मन साइकिल चलाने का हो गया और एक साईकिल चलाने वाला फुल छाप हो गया. चुनाव प्रचार शरू हो गया और फुल बुलडोजर में सवार हो गया और कहने लगा कि ई सात पर तो फुल खिलाएंगे ही और एमएलसी भी फुल से बनवायेंगे, अब भैया इस चुनाव में कई बड़े बड़े फुल के माली भी गंधिपुरी में सिचाई करने आ गयें, अब पियरका कुरता वाला साईकिल पर बैठ के जहाँ जहाँ जायें सब फुले नज़र आये. अब भैया मतदान हो गया और गया मतगणना का दिन. उत्तम प्रदेश धड़ धड फुल खिलने लगा लेकिन कई अन्य जनपद सहित गंधिपुरी में फुलवे मुरझा गया. पता चला की कुल बगीचा पियरका कुरता वाला साईकिल से रौंद दिए रहे. अब भैया फुल के माली ने सोच लिया अब जो भी हो जाये एमएलसी चुनाव नहीं छोड़ना है और एमएलसी बनने के बाद गेटवा को लात मार के पुरे तन मन धन फुल की रखवाली करने वाले एमएलसी ने भी वादा कर दिया कि इस एमएलसी चुनाव में हम किसी भी कीमत पर फुल खिलाएगें.

भैया अब क्या था पियरका चाचा साईकिल के मुखिया के सामने एक शुकुल जी को पेश किये और कहें की ऐसे अच्छा साईकिल कोई न चला पाई. शुकुल जी भी सात गो साईकिल के साथ अधिकारी के पास गये फारम भर दियें और कह दिए की फुल मुक्त गंधिपुरी. अब भैया गेटवा को लात मारके अपना तन मन धन से फुल की रखवाली करने वाले एमएलसी भैया ने इस एमएलसी चुनाव में फुल खिलाने का वादा कर दिया था तो मतलब कर दिया था लेकिन उनके सामने शुकुल जी के अलावा एक थो पहलवान भी परचा भर दिए थे. बहरहाल एमएलसी भैया ने अपने पडोसी जिला वाले फुल के विधायक बने भैया से बतिया के शुकुल को फुल राज्यस्तरीय मालिक से मुलाकात करा दिया. दबी जुबान से लोग बता रहे थे शुकुल जी कहें भैया हम जहाँ धंधा करते हैं उ रास्ता फुल के खेत से होकर जाता है तनकों गड़बड़ायेंगें तो दलदल में गिर जायेगें और बुलडोजर से पाट दिए जायेगें. तो भैया शुकुल जी चले थे फुल मुक्त गंधिपुरी करने और एमएलसी भैया ने शुकुल जी मुक्त साइकिल कर दिया. भैया अब आता कहानी में रोमांच…. फुल के राज्यस्तरीय माली हैं उत्तम प्रदेश के राजा तो भैया जिला में चाहे साईकिल चले या फुल का बगीचा लगे, जिला को देख रेख और शांति व्यवस्था बनाये रखने वाले ज़िम्मेदार को भी तो राजा के आज्ञा को देखना है नहीं दलदलें में ड्यूटी लगा देंगें. तो भैया फुल खिलाना है तो जिम्मेदार लोग पहुँच पहलवान के गाँव और कहें की अब इहें होगा जुटी इहें होगी फुल की खेती. अब भैया क्या था, भागे भागे साइकिल वाले पहुंचे पहलवान के गाँव, खैर पहलवान गाँव पर नहीं थे लेकिन साइकिल वालों ने जिम्मेदारों से कहा भैया अभी आचार सहिंता है काहें जुताई कर रहे हो.

अब भैया साइकिल वाले प्रतिनिधि लोग कलम के सिपाहियों को बुलाते हैं और कहते हैं ई जो पहलवान हैं उ भी साइकिलें चलातें हैं और उहें अब एमएलसी चुनाव में साइकिल चलायेंगें……

खैर लोग कह रहे हैं की इसी कहानी की तरह गाजीपुर एमएलसी चुनाव में घटना घटी है. बताया जा रहा है कि सपा ने भोला नाथ शुक्ला को अपना प्रत्यासी बनाया था लेकिन शुक्ला भाजपा के प्रत्यासी विशाल सिंह चंचल के साथ आते हैं और अपना नामांकन वापस ले लेते हैं. विशाल सिंह चंचल के साथ भोला नाथ शुक्ला को गाडी में बैठा देख लोगों की आँखें खुली की खुली रह जाती हैं. तो वहीँ दूसरी तरफ कभी सपा का समर्थन करने वाले निर्दल प्रत्यासी मदन यादव के गाँव प्रशाशनिक अमला पहुँच जाता हैं.

बताया जा रहा कि मदन यादव के गांव अधियारां में बुधवार को अवैध कब्जे हटाने और सामुदायिक शौचालय की जमीन की पैमाइश करने के लिए जमानिया एसडीएम भारत भार्गव के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम पहुंच गई। पैमाइश के दौरान कई बार ग्रामीणों से कर्मचारियों की नोकझोंक भी हुई।मदन यादव इस गांव के प्रधान हैं और बुलडोजर से उनका घर तोड़ने की चर्चाएं इलाके में शुरू हो गईं इसके बाद कई विधायक, बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता और ग्रामीण वहां पहुंच गए। बुधवार को एमएलसी चुनाव में सपा प्रत्याशी भोलानाथ शुक्ला और निर्दल प्रत्याशी देवेंद्र के नामांकन वापस लेने के बाद भाजपा के विशाल सिंह चंचल एवं निर्दल मदन सिंह आमने सामने हैं।

इधर सपा के विधायक ओमप्रकाश सिंह,  डा. वीरेंद्र यादव, सुहैब उर्फ मन्नू अंसारी के साथ सपा जिलाध्यक्ष रामधारी यादव भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने एसडीएम से चुनाव के दौरान जमीन की पैमाइश करने और अतिक्रमण हटाने पर आपत्ति जताई। उसके बाद राजस्व विभाग के अधिकारी मौके से चले गए। गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है।

विधायक ओमप्रकाश सिंह ने लोगों को आश्वस्त किया कि पार्टी उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के इशारे पर पुलिस प्रशासन पार्टी के लोगों को बेवजह परेशान कर रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आरोप लगाया कि पार्टी प्रत्याशी भोलानाथ शुक्ला का पर्चा दबाव बनाकर वापस कराया गया है।

अब एमएलसी चुनाव में आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है. अब इसके पीछे का सच जो भी सामने आ जायेगा.

हाँ अंत में नुक्कड़ वाले चाचा ने ये भी कहा ये कहानी मेरे सपने आई थी और मैं अपने तिरंगें को देखकर रो रहा था…….

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अभिनेन्द्र की कलम से …………

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