अपनी तहजीब है और अपनी जवां है उर्दू !
अपने घर में मगर अफसोस कहां है उर्दू ****

उर्दू का नमक जो खाते हैं उर्दू पर गुजारा करते हैं!
इस बात का दुख है लोग वही उर्दू से किनारा करते हैं ****

उर्दू पत्रकारिता के 200 साला जश्न आज पूरी दुनिया में जगह जगह और खास करके बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटी ओं में जहां उर्दू भाषा पढ़ाया जाता है उर्दू का जश्न मनाया जा रहा है उर्दू भाषा भारत की बेटी है भारत की सभी भाषाओं से मिलकर उर्दू भाषा बनी हैयही की पैदावार है उर्दू ही भारत है भारत ही उर्दू है
देखा जाए तो दक्षिण भारत के प्रदेशों में उर्दू के प्रमोशन के लिए बहुत कुछ किया गया है और किया जा रहा है परंतु भारत के विशेषकर मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड एवं अन्य प्रदेशों में जो उर्दू के प्रमोशन के लिए सरकार के द्वारा जो कार्य किए जाने थे और करना चाहिए कहीं ना कहीं उर्दू नाइंसाफी की शिकार है अब भारत के प्रत्येक शहर राजधानी जिला सभी स्तर पर उर्दू जो भारत वासियों को एक सूत्र में बांधने का काम करती है और कर रही है इसको प्रमोशन के लिए आवाज बुलंद करना चाहिए ताकि अब इसके साथ किसी प्रकार की कोई नाइंसाफी ना हो सके उर्दू टीचर्स की नियुक्ति अब तत्काल कराई जाए और प्रत्येक प्रदेश में उर्दू पत्रकारिता के कॉलेजेस मुंशी प्रेमचंद मुंशी नवल किशोर एवं अन्य उर्दू से मोहब्बत करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर यूनिवर्सिटी एवं विभागों को स्थापित किया जाए!

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