गाज़ीपुर। “ghazipurwala obaid” नामक एक ब्लॉग ने इंटरनेट पर धमाल मचा दिया है इसके लेखक गाजीपुर निवासी मशहूर साहित्यकार एवं इतिहासकार उबैदुर्रहमान सिद्दीकी है। ये ब्लॉग आज कल चर्चा का विषय है। इसको लगभग 30 लाख लॉगो ने अब तक देखा और पढ़ा है जबकि इनके ब्लॉग को 2015 तक 27 लाख 79 हज़ार तथा 416 लॉगो ने देखा और पढ़ा था।

इस ब्लॉग मे उबैदुर्रहमान ने गाजीपुर जनपद के विभिन्न विषयों पर केंद्रित होकर विस्तार से लिखा है जैसे जनपद की भौगोलिक अन्य प्रदेश के जिलों से कैसे अलग है? यहाँ की जलवायु , नदी और नदियों के किनारे दोनों पाटों की मिट्टी की विशेषता क्या है तथा अनाज उत्पादन की स्तिथी पर, अपना शोध पत्र मय चित्र वर्णन किया है। यह लेख विशेषकर शोधार्थियों के लिए उपयोगी है या जो छात्र विभिन्न ऊच्च कोटि की परीक्षाओ मे सम्मलित हो रहे है।

इन्होंने जनपद की कुछ अहम् शख्शीयतों पर भी रौशनी डाली है जैसे लार्ड कार्नवालिस , वीर अब्दुल हमीद, डाक्टर राही मासूम रजा , ब्रिगेडियर उस्मान के जीवन के अनछुए पहलूओं पर प्रकाश डाला है। लार्ड कार्नवालिस पर बड़े विस्तार से उबैदुर्रहमान ने कलम उठायी है और बहुत से मतभेदों से पर्दा उठाया है. कार्नवालिस से सम्बंधित यह बात कहीं जाती है कि गाजीपुर आते समय गौसपुर मे बीमार हुआ और वहीं मर गया. जबकि ऐसा नहीं हुआ. वो मुहम्मदाबाद से आगे शहर की तरफ अपनी शाही सैनिक टुकडी के साथ आ रहा था तभी वो गौसपुर के आसपास बीमार हुआ और वो तुरंत गोरा बाज़ार नदी तट स्थित सरकारी बंगलो मे ठहराया गया. वो देश का गवर्नर जनरल था तथा उसके साथ माहिर डॉक्टरों का एक विशेष दस्ता था.उसने लार्ड कार्नवालिस देखभाल शुरू की और जो संभव प्रयास उसे बचाने के लिए हो सकता था, वो किया गया. बनारस और इलाहबाद से डॉक्टरों के दस्ते बुलाए गए. 20 दिन तक वो जीवित रहा और फिर मृत्यु हो गई.

उबैदुर्रहमान ने अपने इस ब्लॉग मे उस सरकारी डाक बंगलो की तस्वीर भी सम्मलित की है जहाँ कार्नवालिस ने अंतिम सांस ली थी. यह तस्वीर ब्रिटिश लाइब्रेरी लन्दन से प्राप्त की गई है जिसको लैंडस्केप आर्टिस्ट सीता राम ने बनायीं है जो लार्ड हेस्टिंग्स के साथ 1828 मे गंगा नदी से कश्ती से आया था. सीता राम ने लार्ड कार्नवालिस के प्रारंभिक मकबरे की कुछ तस्वीरों को भी बनाया है जो उस समय बन रहा था. आज जो उसके मकबरे की सनरचना है उसके पूर्व कितने और ब्रिटिश इंजीनियर्स ने मॉडल के रूप मे स्केच किये जो ब्रिटिश अमपायर ने अस्वीकृत कर दिए थे, वे भी इस ब्लॉग मे है.

गाजीपुर के सूफियों और साहित्य पर पर उबैदुर्रहमान ने अपने ब्लॉग मे लिखा है. यहाँ के तीज त्यौहारों पर भी प्रकाश डाला है. विशेषकर डाक्टर राही मासूम रजा पर खूब लिखा है.

इनके अलावा इस ब्लॉग मे विभिन्न कुछ महत्वपूर्ण लॉगो की चर्चा की गई है. एक तरह से यह ब्लॉग जनपद वासियों के लिए जानकारी का पिटारा है जिसे पढ़ना चाहिए।

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