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मजदूरों की हादसे में हुई मौत पर उनके परिवार जनों को 50 लाख रुपया मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की

संवाददाता शैलेंद्र शर्मा

आज़मगढ़। उत्तर प्रदेश सरकार उद्योगपतियों के हित में श्रम कानून तीन साल के लिए स्थगित कर मजदूरों को बंधुआ मजदूर बनाना चाहती है | योगी सरकार द्वारा मजदूरों के खिलाफ लाये गए अध्यादेश की वापसी एवम लॉकडाउन के दौरान अन्य राज्यों से अपने राज्य यूपी लौट रहे मजदूरों की हादसे में हुई मौत पर उनके परिवार जनों को 50 लाख रुपया मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग को लेकर आम आदमी पार्टी की कार्यकर्ता प्रदेश भर में आज एक दिवसीय उपवास रखे।
आम आदमी पार्टी की प्रदेश ईकाई ने सरकार के इस तुगलकी फरमान के खिलाफ 11 मई, दिन सोमवार को उत्तर प्रदेश के सभी पदाधिकारी और कार्यकर्त्ता अपने घरों में उपवास कर विरोध दर्ज कराने और साथ ही सरकार से मांग करनें कि लॉकडाउन के दौरान घर वापसी के दौरान जिन मजदूरों की मौत हो गई है, उनके परिवार को 50 लाख रुपया और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए । प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश यादव एड ने जारी प्रेस नोट में कहा कि इस अध्यादेश से उत्तर प्रदेश में श्रमिकों की स्थिति गुलामों जैसी हो जाएगी। इस तरह प्रदेश में श्रमिकों को पूरी तरह मालिकों के रहमो करम पर छोड़ दिया गया है। पूंजीपति चाहें तो मजदूरों का मनचाहा शोषण कर सकेंगे। सरकार और कानून के पास कोई शिकायत नहीं कर सकेगा। किसी प्रकार की शिकायत मजदूर की नहीं सुनी जाएगी।ये फरमान पूरी तरह श्रमिक हितों के विरुद्ध है।

जिलाध्यक्ष रविन्द्र नें कहा कि आज हमारे जनपद के सभी ब्लाकों के कार्यकर्ता उपवास पर हैं और ये लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
भवदीय
राजेश यादव एड.
प्रदेश उपाध्यक्ष आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश

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