संवादाता : हसीन अंसारी

गाजीपुर | वीर शहीदों की धरती उत्तर प्रदेश का जनपद गाजीपुर,जहां आज़ादी के अमर परवानों को छोड़ दें तो भी आजादी के बाद से आज तक लगभग सैकड़ों की संख्या के नजदीक भारतीय सेना तथा अर्द्ध सैनिक बलों में अदम्य साहस से शहीद रणबांकुरों की एक लम्बी श्रृंखला है ।

सेना तथा सुरक्षा बलों में शामिल होने का हौसला इस धरती के जर्रे जर्रे में विद्यमान है। वीरता और पराक्रम का कभी भी कोई अवसर न चुके इसके लिए यहां की मिट्टी फौलाद पैदा करती है। जिसका प्रमाण देश रक्षा के प्रति कोई भी रणभूमि रही हो, गाजीपुर ने देश का मस्तक ऊंचा रखते हुए रक्त तिलक लगाया है। यहां की माताओं ने अपने कलेजे के टुकड़े को खोया है तो पिताओं ने नम आंखों से अपने हृदय पर अपने पुत्र की चिता जलाई है। जहां पत्नीयों ने वीरांगना बन अपने माथे को धोया तो वहीं बहनों और भाइयों ने अपने उम्मिद आंशुओ को पिया है।
इसी वीर देशभक्त धरती के रक्त तिलकधारी शहीदों की श्रेणी में एक नाम और जुड़ गया.वो नाम है अमर शहीद अश्वनी कुमार यादव उर्फ सोनू यादव जो गाजीपुर जिले के नोनहरा थानान्तर्गत ग्राम चक दाऊद के रहने वाले हैं.

5 जुलाई सन् 1988 को श्रीमती लालमुनि देवी पत्नी श्रीराम सिंह यादव के तीन पुत्रों में सबसे बड़े रुप में पैदा हुए। तत्पश्चात 2005 में राष्ट्र सुरक्षा सेवा में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल में प्रविष्ट हुए और 4 मई 2020 को देश की सुरक्षा को तत्पर जम्मू-कश्मीर राज्य के श्रीनगर स्थित हंदवाड़ा के काजियाबाद सेक्टर में शाम 4:00 बजे अपनी पेट्रोलिंग पार्टी के साथ सर्च ऑपरेशन के लिए निकले थे, उसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे राष्ट्र के दुश्मन आतंकवादियों ने गश्ती दल पर अचानक हमला कर दिया। जिसमें अश्वनी कुमार यादव अपने पिछे बुढ़ी मां,दो भाइयों अंजनी और अमन,एक बेटी आईशा 6 वर्ष और बेटे आदित्य 4 वर्ष को पत्नी अंशु देवी के सहारे छोड़ वीरता से शहीद हो गए ।

इस दौरान मीडिया से बात करते हुए शहीद के भाई अंजनी ने कहा कि वह चाहते हैं कि सरकार उन्हें मौका दे और वह फौज में जाएं जिससे कि वह अपने भाई का बदला ले सकें, उन्होंने कहा कि आखरी बार परिवार से उनका बीते शाम बात हुआ था। इस दौरान उन्होंने बताया कि वह ड्यूटी पर हैं और ड्यूटी खत्म होने पर बात करेंगे।
अश्वनी कुमार यादव के वीरता पर हम और हमारा गाजीपुर गर्व करता है और हम आपको अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

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