ब्यूरो डेस्क | कोरोना संक्रमण से पूरा विश्व ग्रसित है, ऐसे में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुरे देश को 3 मई तक लॉक डाउन करने कि घोषणा किया है. जिसका पालन सख्ती से स्थानीय प्रशासन द्वारा करना है.

कोरोना संक्रमण एक ऐसी बीमारी है जो छूने से फैलती है, इसीलिए इस बीमारी से बचने के लिए सोशल डिस्टेंस का पालन करना अनिवार्य है. भारत में बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते सरकार द्वारा सख्त कार्यवाही की जा रही है.

ऐसे में जिलाधिकारी गाजीपुर द्वारा किसी भी प्रकार का स्टेशनरी और बुक स्टाल की शॉप खोलने की अनुमति नहीं है. सरकार के आदेश पर स्कूलों द्वारा ऑनलाइन पढाई करवाई जा रही है. ऐसे में शाहफैज़ पब्लिक स्कूल ने छात्रों के लिए whatsapp का इस्तेमाल किया और whatsapp द्वारा विडियो और फोटो भेजकर छात्रों को पढाया जा रहा है, जिसकी तारीफ छात्रों द्वारा भी की जा रही है. शाहफैज़ के बारे में बताया जाता है कि इस स्कूल में बेहतर शिक्षा व्यवस्था है.

लेकिन इस दौरान स्कूल कि तरफ से छात्रों को whatsapp पर बुकस्टाल से किताबें खरीदने के लिए सन्देश भेजा गया. जब इस बाबत पत्रकार द्वारा शाहफैज़ के डायरेक्टर से बात किया गया तो उन्होंने इसको संज्ञान में लेते हुए, छात्रों को सन्देश द्वारा ऑनलाइन पढाई करने और घर से न निकलने की बात कही.

लेकिन पत्रकार द्वारा की गई पूछताछ की जानकारी जब स्कूल के एक महिला कर्मचारी (जो की स्कूल में कार्डिनेटर का काम भी करती हैं) को पता चली तो उसे पसंद नहीं आया और उन्होंने पत्रकार की पत्नी (जो कि इसी स्कूल में अध्यापक हैं) को फ़ोन कर आपत्तिजनक बातें करने लगीं. उन्होंने कोरोना महामारी और पत्रकार पर गैर जिम्मेदाराना टिपण्णी किया. जब इसकी जानकारी स्कूल के डायरेक्टर को दी गई तो उन्होंने उस महिला कर्मचारी के व्यवहार पर नाराजगी जताई.

ज्यादातर लोगों के अनुसार शाहफैज़ पब्लिक स्कूल अपनी बेहतर शिक्षा और अनुशासन के लिए जाना जाता है और स्कूल के डायरेक्टर डॉ. नादिम अधमी ने भी इसका बखूबी परिचय देते हुए, स्कूल के एक महिला कर्मचारी (जो की स्कूल में कार्डिनेटर का काम भी करती हैं) के ऊपर सख्त कार्यवाही करने का निर्णय लिया. उन्होंने कहा कि चूँकि लॉक डाउन चल रहा है, और हमें इसका पूरा ख्याल है इसलिए स्कूल खुलने पर हम सख्त कार्यवाही करेंगें.

कोरोना संक्रमण एक गंभीर मामला है, आज पुरे विश्व में इस संक्रमण से हजारों लोगों की जान जा चुकी है. इस संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंस का पालन करना बेहद जरुरी है, कोरोना संक्रमण की इस लड़ाई में मेडिकल स्टाफ, पुलिसकर्मी, मीडियाकर्मी, सुरक्षा कर्मी जैसे लोग दिन रात लगे हैं. जहाँ एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इनका उत्साह बढाने के लिए, देश कि जनता से थाली, घंटी बजाने और दिया जलाने का अनुरोध किया था, जहाँ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लॉक डाउन के पालन का कर्तव्य निभाया और अपने पिता के देहांत होने पर भी उन्होंने जनता की सेवा को प्रथम प्राथमिकता देते हुए, देश को सन्देश दिया. तो ऐसे किसी संस्थान के कर्मचारी द्वारा कोरोना और मीडिया पर गैर जिम्मेदाराना टिपण्णी करना दुर्भाग्य पूर्ण है. शाहफैज़ स्कूल के डायरेक्टर ने भी कड़ा निर्णय लेकर, ये सन्देश दिया है कि देश की सुरक्षा हमारी प्रथम प्राथमिकता है.

 

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