ब्यूरो डेस्क | कोरोना संक्रमण एक गंभीर मुद्दा है, जिसका जड़ से ख़त्म होना अति आव्यश्यक है.ऐसे में सोशल डिस्टेंस का पालन करना अति आव्यश्यक है, लेकिन उतना ही जरुरी है कोरोना संक्रमित लोगो का पता लगाना. यहाँ पर कुछ महत्वपूर्ण सवाल खड़े होते हैं:

  1. क्या नॉन हॉटस्पॉट एरिया में कोरोना संक्रमण कि जाँच संभव है?
  2. क्या खाद्य सामग्री का वितरण करने वालों का टेस्ट किया जा रहा है?
  3. हमारे देश में टेस्टिंग करने का दर क्या है?

कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने गुरूवार को दिन में 1 बजे विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रेस वार्ता किया. उन्होंने कहा कि “लॉकडाउन किसी भी तरह से कोरोना वायरस को नहीं हराएगा ये बस कुछ समय तक वायरस को रोक कर रखेगा। जब लॉकडाउन खत्म होगा तो ये वायरस फिर से फैल सकता है.”

उन्होंने आगे कहा कि “वायरस के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार टेस्टिंग है। बड़े पैमाने पर टेस्टिंग से आपको अंदाजा लग जाता है कि वायरस किस दिशा में बढ़ रहा है। ऐसे में आप वायरस को आइसोलेट कर सकते हैं, टारगेट कर सकते हैं और फाइट कर सकते हैं. हमारा टेस्टिंग दर दस लाख में 199 लोग है, पिछले 72 दिनों में हमने जितने भी टेस्ट किए हैं उनमें से प्रत्येक जिला औसतन 350 टेस्ट कर रहा है.”

उन्होंने कहा कि “अभी हम सिर्फ वायरस का पीछा कर रहे हैं। किसी को वायरस हुआ फिर हम उसके पीछे दौड़ रहे हैं। बिना रैंडम टेस्टिंग आप वायरस के पीछे ही दौड़ते रहेंगे वायरस आपके आगे निकलता जाएगा। रैंडम टेस्टिंग करोगे तो ही आप वायरस को रोक पाओगे. मैं बहुत सारे मुद्दों से नरेंद्र मोदी से असहमत हूं लेकिन अब लड़ने का समय नहीं है। एकजुट होकर वायरस से लड़ें.”

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