ब्यूरो डेस्क। पुरे विश्व में कोरोना महामारी ने पैर पसार लिया है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) ने इसे 31 जनवरी 2020 को ही विश्वस्तरीय इमर्जेन्सी बताया था। लेकिन कही न कहीं किसी लापरवाही से कोरोना महामारी लगातार बढ़ता जा रहा है। ये संक्रमण एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। इस संक्रमण की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई है तो स्वाभाविक है कि जब वहाँ से कोई संक्रमित मरीज दूसरे देश में गया तो उससे ये संक्रमण वहां फ़ैल गया और इसका चेन बनता गया।

आज भारत में संक्रमित मरीजों की संख्या 2088 हो गई है, भारत में अब तक 56 लोगों की मौत कोरोना की वजह से हो चुकी है। निजामुद्दीन के तब्लीगी ज़मात में हुई घोर लापरवाही से ये संक्रमण अब उत्तर प्रदेश के कोने तक पहुँच गया है। उत्तर प्रदेश के जनपद गाज़ीपुर में पुलिस ने तब्लीगी ज़मात में शामिल 11 लोगों को अपने कब्जे में लिया था, जिनमे से एक कोरोना पॉजिटिव निकला।

सरकारों की चेतावनी के बावजूद भी केवल 10 मार्च के बाद ही देश के अलग हिस्सों में भीड़ लगी और भीड़ को इकठ्ठा करने में कहीं न कहीं नेताओं का हाथ था।  कोई अपने सरकार की उब्लब्धियों को गिनाने के लिए सैकड़ों लोगों के बिच में कार्यक्रम संचालित कर रहा था तो अपने उब्लब्धियों के जश्न में सैंकड़ों लोगों को शामिल कर रहा था , कोई तख्ता पलट कर सैंकड़ों के बिच शपथ ले रहा था और कोई कोरोना पॉजिटिव सेलिब्रिटी, अपने रसूख में सरकार के कद्दावर मंत्रियों संग पार्टी कर रही थी।

शायद इन लापरवाह लोगों लोगो को ये नहीं पता था कि दिसंबर 2019 में चीन में शुरू कोरोना संक्रमण, जनवरी तक पुरे विश्व में फैलने लगा और इसने महामारी का रूप ले लिया। शायद इन्हे ये नहीं पता था कि WHO ने इसे विश्वस्तरीय इमर्जेन्सी करार दिया। शायद इन्हे ये नहीं पता था भारत के कई हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग की व्यवस्था नहीं थी।

सरकार तो देर सही लेकिन चैतन्य होना शुरू हो गई थी, लेकिन सरकारों के मंत्री और विधायकों ने इसे हल्के में ले में लिया। अगर समय रहते निजामुद्दीन के तब्लीगी ज़मात पर सख्त कार्यवाही की गई होती तो कुछ बच सकता था।

खैर अभी इस महामारी से बचने का एक ही उपाय है कि अपने घरों से निकलने की कोशिश न करें, जरुरत पड़ने पर ही कोई एक इंसान घर से निकले और अपने हाथों को बार बार धोना न भूलें। यदि आप आव्यश्यक काम से बहार गए थे तो घर आकर बिना किसी से संपर्क में आये अपने कपड़ों को सर्फ़ से धूल लें और हाथ धुलने के बाद ही कोई काम करें। इस दौरान अपने आँख या मुहं को बिना हाथ धोये न छुएं।

यदि कोई कोरोना पीड़ित है तो उसे दोषी न माने, वो एक मरीज है, जब वो ठीक होकर आये तो उसका हौसला बढ़ाएं।

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