ब्यूरो डेस्क।

सुप्रीम कोर्ट के 46वें चीफ जस्टिस के रूप में रंजन गोगोई का कार्यकाल करीब साढ़े 13 महीने का रहा. इस दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए. इनमें से अयोध्या भूमि विवाद, सबरीमाला मामला, चीफ जस्टिस का ऑफिस पब्लिक अथॉरिटी, सरकारी विज्ञापन में नेताओं की तस्वीर पर पाबंदी, अंग्रेजी और हिंदी समेत सात भाषाओं में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को प्रकाशित करने का फैसला प्रमुख रहा.

रंजन के पिता केशब चंद्र गोगोई असम के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. जस्टिस रंजन नार्थ ईस्ट से आने वाले पहले चीफ जस्टिस थे.

अब 19 मार्च 2020. सुबह 11 बजे पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) रंजन गोगोई ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 16 मार्च को उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था. रंजन के शपथ लेने के दौरान विपक्षी सांसदों ने शेम-शेम के नारे लगाए। आपको बता दें रंजन गोगई के राज्य सभा में जाने की खबर पर ही विरोध होना शुरू हो गया था और अब सदन में भी इसका असर दिखाई दिया।

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