पंजाब- अमृतसर के चौक के मोनी एरिया में रहने वाले हरदीप सिंह ने साल 2004 में 30 और 31 अक्टूबर के बीच की रात अपनी माँ, पत्नी और दो बच्चों के साथ सुसाइड कर लिया था| घर की दीवारों पर सुसाइड नोट लिखा था| इस नोट में हरदीप सिंह ने अपनी बहन परमिन्द्र कौर, उसके पति परविंदरपाल सिंह, अपने चाचा मोहिंदर सिंह, उनकी बहु सबरीन कौर और कुलतार सिंह के ऊपर ब्लैकमेल करने के आरोप लगाए थे| इसका कारण भी बताया था कि उसने अपने पिता सुन्दर सिंह की हत्या की थी, और ये बात कुलतार सिंह समेत बाकी लोगों को भी पता चल गयी थी| और इसी का फायदा उठाकर वो लोग हरदीप को ब्लैकमेल कर रहे थे| उस वक़्त कुलतार सिंह अमृतसर सिटी के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) थे| DSP हरदेव सिंह को साबुत मिटने के जुर्म में दोषी पाया गया उनपे आरोप लगे थे कि उन्होंने दिवार पर लिखे सुसाइड नोट से कुलतार सिंह का नाम मिटा दिया था| अमृतसर पुलिस पर आरोप लग रहे थे कि आरोपियों के खिलाफ केस तो दर्ज हो गया था लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई थी| फिर साल 2009 में पंजाब मानव अधिकार सरबजीत सिंह मामला को लेकर लोकल कोर्ट गए| बताया कि लोकल पुलिस ठीक से मामलें की जांच नहीं कर रही है| फिर कोर्ट ने साल 2011 सितंबर में कुलतार सिंह, हरदेव सिंह के खिलाफ गैर -जमानत वारंट जारी किया| अमृतसर कोर्ट ने इस केस में 7 फरवरी 2020 के फैसले में 19 फरवरी को सजा का एलान किया जिनमें से 6 लोगों को दोषी करार दिया| दोषियों में पंजाब पुलिस के पूर्व डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) कुलतार सिंह और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस(DSP) हरदेव सिंह भी शामिल हैं| इसके अलावा सुसाइड करने वाले के चार रिश्तेदार भी शामिल हैं|

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